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नेपाल तो ट्रेलर है, भारत में दिख सकता है भयानक दृश्य

नेपाल में आई भयानक बाढ़ से भी कहीं ज्यादा तबाही भारत में मच सकती है लेकिन हमारे देश की सरकार सोई हुई है ! दरअसल, 2025 से ही चीन ने भारत-चीन सीमा पर दुनिया का सबसे विशालकाय बांध बना शुरू कर दिया है.
 
चीन सरकार द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जा रहा जांगमु बांध. (फाइल फोटो)

Girish Malviya

नेपाल में आई भयानक बाढ़ से भी कहीं ज्यादा तबाही भारत में मच सकती है लेकिन हमारे देश की सरकार सोई हुई है ! दरअसल, 2025 से ही चीन ने भारत-चीन सीमा पर दुनिया का सबसे विशालकाय जांगमु बांध बना शुरू कर दिया है.

 

नेपाल में बाध की घटना पर पढ़ें Live Update....

 

यह बांध हिमालय पर्वतमाला में एक विशाल घाटी पर बनाया जा रहा है जहां ब्रह्मपुत्र नदी एक विशाल यू-टर्न लेकर अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश में दाखिल होती है. इस मेगा प्रोजेक्ट का साइज दुनिया के किसी भी अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से कहीं ज्यादा बड़ा है जिसमें चीन का अपना थ्री गॉर्जेस बांध भी शामिल है, जिसे दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है.  यह डैम न सिर्फ एक जमीन की दरार के पास स्थित है, बल्कि इसकी निर्माण-स्थल की संरचना भी ढीली और कमजोर पकड़ वाली है.

 

देश के जाने माने रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने चीन के सबसे बड़े डैम को लेकर चेतावनी दी है कि दरार में हलचल या भूकंप से जलाशय के ढलानों में अस्थिरता बहुत आसानी से पैदा हो सकती है, जिससे पूरे डैम प्रोजेक्ट और आस-पास के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.

 

दरअसल, चीन के नए सुपर-डैम से जुड़े जोखिम बहुत ज्यादा हैं, क्योंकि इसे हिमालय के भूकंप की दृष्टि से सक्रिय इलाके में बनाया जा रहा है, जहां इंडियन और यूरेशियन प्लेटें आपस में टकराती हैं. इस इलाके में एशिया के कुछ सबसे शक्तिशाली भूकंप आए हैं, जिनमें 2025 का विनाशकारी म्यांमार भूकंप भी शामिल है.

 

ब्रह्म चेलानी कहते है- नदी के ऊपरी हिस्से में पानी का एक संभावित बम तैयार किया जा रहा हो, तो निचले हिस्से में खामोशी को कैसे सही ठहराया जा सकता है? 'चीन के सबसे बड़े डैम को लेकर चीन के ही वैज्ञानिक गंभीर भू-वैज्ञानिक खतरों की चेतावनी दे रहे हैं, फिर भी नई दिल्ली क्यों चुप है?

 

अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी हाल ही में चीन के इस मेगा डैम को भारत के लिए 'वाटर बम' बताया था. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ पर्यावरणीय या जल सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि अस्तित्व के लिए भी खतरा है. उन्होंने कहा कि इस बांध से सैन्य खतरा पैदा होगा और यह सीमावर्ती जनजातियों के जीवन, भूमि और संसाधनों को बर्बाद कर सकता है. इस डैम से भारत के पूर्वोत्तर, खासकर असम के मैदानी इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर खतरा मंडरा रहा है

 

अगर चीन ये बांध बना लेता है और भगवान न करे कि किसी भी तरह से ये बांध टूट जाता है तो नेपाल में जो बाढ़ भयानक दृश्य आप अभी देख रहे है वो आपको ट्रेलर मात्र ही लगेगा. 

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