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झारखंड में झींगा मछली की बढ़ती खपत पर नई पहल, उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

  • - जलाशयों में डाले गए 23 लाख झींगा के बीज 
  • - बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
Ranchi: राज्य में झींगे (Prawn) की बढ़ती खपत को देखते हुए स्थानीय स्तर पर इसके उत्पादन बढ़ाने की पहल तेज कर दी गई है. इसके तहत बड़े जलाशयों में झींगा पालन का दायरा बढ़ाया जा रहा है, ताकि बाहर से होने वाली आपूर्ति पर निर्भरता कम हो सके. साथ ही मत्स्य पालकों की आय में बढ़ोतरी हो और उपभोक्ताओं को ताजा उत्पाद मिल सके.
मत्स्य विभाग ने पहले चरण के सकारात्मक परिणामों के बाद अब दूसरे चरण में 9 जलाशयों में बड़े स्तर पर झींगा पालन शुरू किया है. इस अभियान के तहत करीब 23 लाख झींगा बीज विभिन्न बांधों में छोड़े गए हैं. “मैक्रोब्रैकियम रोसेनबर्गी” प्रजाति के ये झींगे अक्टूबर तक तैयार होने की उम्मीद है.

10 टन झींगा उत्पादन का लक्ष्य

करीब 10 टन झींगा पालन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है जिससे एक हजार मत्स्य पालकों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है. इससे पहले 2022 में शुरू हुए पहले चरण में सिमडेगा, हजारीबाग और गुमला के जलाशयों में करीब 5 टन उत्पादन हुआ था, जिससे 500 से अधिक किसानों की आमदनी में इजाफा हुआ. 

परिणाम के बाद विस्तार की तैयारी

फिलहाल रांची के बेरो स्थित करंजी बांध और चान्हो के ओपा बांध के अलावा लोहरदगा, लातेहार, दुमका और गुमला के जलाशयों में यह योजना लागू है. इसके साथ ही पलामू के एक तालाब में प्रायोगिक तौर पर झींगा पालन किया जा रहा है. मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा है, तो अन्य जल निकायों में भी इसे लागू किया जाएगा.
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