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नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना आज से लागू, झारखंड में मजदूरों की बढ़ेगी मजदूरी

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को लागू कर दिया है. इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरी दरों में संशोधन करते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नई दरें अधिसूचित कर दी गई हैं.
 
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  • औसतन 10 प्रतिशत मजदूरी बढ़ी
  • अब 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

Ranchi :  केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को लागू कर दिया है. इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरी दरों में संशोधन करते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नई दरें अधिसूचित कर दी गई हैं.

 

नई व्यवस्था के तहत देशभर में औसत दैनिक मजदूरी 298.80 रुपये से बढ़ाकर 327.40 रुपये कर दी गई है, यानी प्रति दिन औसतन 28.60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, नई मजदूरी दरें 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सभी अधिसूचित क्षेत्रों में लागू होंगी.

 

सरकार ने पहली बार 300 रुपये प्रतिदिन का अंतरिम न्यूनतम आधार मजदूरी निर्धारित किया है, ताकि किसी भी राज्य में मजदूरी इससे कम न हो. देशभर में मजदूरी दरों में औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है.

 

 

नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों तक रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी. मंत्रालय के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है. जबकि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में सबसे अधिक करीब 24.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

 

नई अधिसूचना के अनुसार, हरियाणा में 409 रुपये, गोवा में 406 रुपये, केरल में 401 रुपये और सिक्किम के ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्रों में 450 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित की गई है. योजना के प्रभावी संचालन और समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन भी किया है.

 

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते. योजना के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों की भूमिका पहले की तरह बनी रहेगी. इसके तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल संरक्षण, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों, ग्रामीण आधारभूत संरचना और महिला सशक्तीकरण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी.

 

 

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