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बांग्लादेश में तख्तापलट की खबर, आर्मी चीफ ने लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की, शेख हसीना ने छोड़ा ढाका

Lagatar Desk : बांग्लादेश में तख्तापलट की खबर है. प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दिया है. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है. बांग्लादेश के आर्मी चीफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की है. आर्मी चीफ ने कहा कि आपकी मांगें हम पूरी करेंगे. तोड़ फोड़ मत कीजिए. आप लोग हमारे साथ चलेंगे तो हम स्थिति बदल देंगे. आग्रह किया कि मारपीट. अराजकता, संघर्ष से दूर रहिए. हमने आज सभी पार्टी नेताओं से बात की है.

शेख हसीना के आवास पर प्रदर्शनकारी घुस गये हैं

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के आवास पर प्रदर्शनकारी घुस गये हैं. वहीं शेख हसीना ने ढ़ाका छोड़ दिया है. वह अपनी बहन के साथ किसी सुरक्षित जगह पर चली गई हैं. अब यह माना जाने लगा है कि सेना देश की कमान अपने हाथ में ले सकती है. इन सबके बीच खबर यह है कि ढाका छोड़ने से पहले शेख हसीना अपना भाषण रिकॉर्ड कराना चाहती थी. लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया. बांग्लादेश में पिछले कई दिनों से आरक्षण को लेकर हिंसा का जो दौर शुरु हुआ है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार ने प्रदर्शन को कुचलने के लिए कठोर कार्रवाई की. लेकिन पूरे देश में शेख हसीना के प्रति लोगों की नाराजगी बढ़ती गई. पिछले दिनों बांग्लादेश में हुए चुनाव में भी शेख हसीना पर आरोप लगाया था कि उन्होंने बड़े स्तर पर गड़बड़ी कर जीत हासिल की थी. था. जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश में  कर्फ्यू लगा दिया गया है. सेना के जवान प्रदर्शन पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं. अब तक 100 से अधिक आम लोग और पुलिस के जवान मारे जा चुके हैं. शेख हसीना वर्ष 2009 से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं. उनके कार्यकाल में देश ने अलग-अलग मोर्चों पर तरक्की की. खासकर आर्थिक मामलों ने बांग्लादेश ने बड़ी छलांग लगायी. इसे भी पढ़ें - देवघर">https://lagatar.in/devotees-raised-slogans-against-the-police-administration-in-deoghar-said-facilities-are-not-available/">देवघर

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चुनाव के बाद से बढ़ने लगा विद्रोह

बांग्लादेश में जनवरी माह में चुनाव हुआ. विपक्षी पार्टियों ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था. चुनाव में शेख हसीना की पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की. लेकिन इसी के बाद से लोगों में विद्रोह शुरु हो गया था. जिसके बाद सरकार ने विद्रोह को कुचलने के लिए कड़ी कार्रवाई की. इन सबके बाद भी विद्रोह बढ़ता गया. धीरे-धीरे विरोध हिंसक रूप लेता चला गया और सात महीने के भीतर शेख हसीना को प्रधानमंत्री आवास छोड़ना पड़ा. वह कहां गईं हैं, इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है. इसे भी पढ़ें - कोचिंग">https://lagatar.in/coaching-centers-have-become-death-chambers-supreme-court-issues-notice-to-central-government-and-delhi-government/">कोचिंग

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