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अखबारों व टीवी चैनलों को मिल ही गया गडकरी का टैग

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अखबार और टीवी चैनलों को लेकर बड़ा बयान दिया है. इथेनॉल के मुद्दे पर उन्होंने कहा है कि कोई प्रिंट (अखबार) वाला नहीं छाप रहा, कोई टीवी वाला नहीं दिखा रहा, बस सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स मेरे (गडकरी) के खिलाफ रील बना रहे हैं.
 
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परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अखबार और टीवी चैनलों को लेकर बड़ा बयान दिया है. इथेनॉल के मुद्दे पर उन्होंने कहा है कि कोई प्रिंट (अखबार) वाला नहीं छाप रहा, कोई टीवी वाला नहीं दिखा रहा, बस सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स मेरे (गडकरी) के खिलाफ रील बना रहे हैं.

 

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इथेनॉल के मुद्दे पर उनका यह बयान बिल्कुल सही है. अखबार या टीवी पर इससे जुड़ी खबरें ना के बराबर है. खबरें हैं भी तो मंत्री का बयानों की. उनके बयानों पर कोई सवाल मेन स्ट्रीम मीडिया में कम ही है. लेकिन सोशल मीडिया पर लोग अपनी पीड़ा खुलकर कह रहे हैं.


देखा जाये तो यह पहला मौका या मुद्दा नहीं है, जिस मामले में मेन स्ट्रीम मीडिया ने चुप्पी साध ली है. पहले भी कई ऐसे मुद्दे लोगों के बीच सोशल मीडिया के जरिये ही पहुंचे, जिससे केंद्र सरकार की फजीहत हुई. इस मामले में साल 2014 के बाद हालात बदतर ही होते जा रहे हैं.


यह सही है कि सोशल मीडिया पर अधिकांश रील या वीडियो अधकचरी जानकारी से भरे पड़े हैं, लेकिन यह भी सच है कि सोशल मीडिया की बदौलत ही भाजपा सत्ता में आयी. सोशल मीडिया पर ही झूठ पर झूठ बोल कर, बताकर, दिखाकर विपक्ष को निकम्मा बताया गया. लेकिन जब यही सोशल मीडिया इथेनॉल को लेकर रील बनाने लगा, तो गडकरी को दिक्कत होने लगी है.

 

सरकार ने दो दिन पहले यह तो मान ही लिया है कि इथेनॉल मिले पेट्रोल से गाड़ी की माईलेज कम होती है, पर इससे पेट्रोल कम आयात करना पड़ रहा है. लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि देश को कितना कम पेट्रोल आयात करना पड़ा. और वाहन चालकों को इस कुर्बानी के बदले क्या मिला? सस्ता पेट्रोल तो बिल्कुल नहीं मिला.


सरकार ने यह भी नहीं बताया कि इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने से किसानों को कितना फायदा मिला. सरकार यह बताना भी भूल गयी कि अगर हम इथेनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इससे पर्यावरण को कितना लाभ हो रहा है और पानी की उपलब्धता पर क्या असर पड़ रहा है.


बहरहाल, गडकरी का ताजा बयान मेन स्ट्रीम मीडिया के मुंह पर तमाचा है. जो बात विपक्ष कहता रहा है, जो आरोप बहुत सारे लोग लगाते रहे हैं, गडकरी ने उसे सही करार दिया है. कुल मिलाकर कहें तो गडकरी ने मेन स्ट्रीम मीडिया को एक टैग तो दे ही दिया है.

  

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