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धनबाद के भिखारियों को मुख्य धारा से जोड़ेगी “निर्मला”, सर्वे शुरू

Mithilesh Kumar Dhanbad : शहरी क्षेत्र में सड़कों पर भीख मांग कर जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार ने मुस्कान योजना शुरू की है. इसका उद्देश्य शहर के भिखारियों को चिह्नित कर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ना है. धनबाद (Dhanbad)">https://lagatar.in/dhanbad-whose-appointment-was-questioned-made-him-the-principal-in-charge-of-the-college/">(Dhanbad)

शहर में यह काम दिल्ली की एनजीओ निर्मला निर्मला सोशल एवं एडुकेशन ऑर्गेनाइजेशन को सौंपा गया है. नगर निगम के निर्देश पर संस्था शहर में भिखारियों का पता लगाने के लिए सर्वे कर रही है. 12 अगस्त से यह काम शुरू है.

2 अक्टूबर को लॉन्च होगी मुस्कान योजना

निर्मला सोशल एवं एडुकेशन ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष शैलेश कुमार ने बताया कि केंद्रीय समाज कल्याण मंत्रालय ने इस योजना के फर्स्ट फेज में देश के 75 शहरों को चुना है, जिसमें झरखंड का रांची और धनबाद शहर शामिल है. इन दोनों शहरों के लिए मंत्रालय ने निर्मला को शार्टलिस्ट किया है. योजना की लॉन्चिंग 2 अक्टूबर को होगी. इसके पहले संस्था ने सारी तैयारी पूरी कर लेनी है. रांची में सर्वे का काम पूरा हो चुका है, जबिक धनबाद में सर्वे चल रहा है.

शहर को भिखारी मुक्त करना है योजना का उद्देश्य

एनजीओ के अध्यक्ष ने बताया कि इस योजना का मूल उद्देश्य शहर को भिखारी मुक्त करना है. भीख मांगना एक सामाजिक बुराई है, इससे इन्हें उबारने की पूरी कोशिश करेंगे. शहर में जहां-जहां भिखारी रहते हैं, सबसे पहले वहां जाकर इनकी पहचान की जाएगी. किसी भी तरह का पहचान पत्र नहीं होने पर स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इन्हें पहचान पत्र दिलाया जाएगा. इसके बाद इनके रहने की व्यवस्था, शिक्षा और स्किल से जोड़ने का काम किया जाएगा. इन्हें सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा. ये सबकुछ सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप होगा.

ओल्ड एज होम में दिलाई जाएगी जगह

अध्यक्ष ने बताया कि धनबाद में भिखारियों के अलावा लोगों में नशे की बुरी आदतों को छुड़वाने तथा घर से सताए हुए लोगों को ओल्ड एज होम में जगह दिलाई जाएगी. मंत्रालय ने संस्था को यह काम एक साल के लिए दिया है. परफॉर्मेंस के आधार पर आगे समय बढाया जा सकता है.

धरातल पर नहीं दिख रहा काम

एनजीओ की तमाम घोषणाएं फ़िलहाल खोखली लग रही हैं. पिछले एक माह के सर्वे में कितने लोगों को चिह्नित किया गया. इसकी जानकारी संस्था के अध्यक्ष नहीं दे पाए. भिखारियों के लिए पहचान पत्र की अनिवार्यता सबसे बड़ी बाधा बनेगी, इससे कैसे निपटेंगे, इसका जबाब भी उनके पास नहीं मिला. ये भिखारियों को मुख्य धारा से कितना जोड़ पाएंगे, ये तो आने वाला वक्त बताएगा. फ़िलहाल] इस एनजीओ को लेकर नगर निगम के अधिकारी भी असमंजस में है. यह भी पढ़ें :">https://lagatar.in/dhanbad-firing-between-bank-more-police-and-criminals-one-dead-due-to-bullet-injuries/">

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