Ranchi News : आदिवासी नेत्री निशा भगत का शव पोस्टमार्टम के लिए रिम्स ले जाया गया है. पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पुलिस बल की तैनाती की गई है. इस बीच रांची के सांसद और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, जेएलकेएम के नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कई लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे हैं.
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निशा भगत के आत्महत्या की घटना को लेकर को लेकर उन्होंने जमीन माफियाओं को खुली छूट देने और बिगड़ी कानून व्यवस्था का आरोप लगाया है. संजय सेठ ने पिठौरिया थाना प्रभारी को भी तत्काल सस्पेंड करने की मांग की है.

मंत्री संजय सेठ समेत कई नेता पहुंचे पोस्टमार्टम हाउस
जेएलकेएम के वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो भी रिम्स पहुंचे हैं. उधर पिठौरिया के डहुटोली में उनके घर के बाहर भी बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है. किसी को भी उनके घर के अंदर जाने की मनाही है. प्रशासन ने मीडिया कर्मियों को भी निशा भगत के घर तक जाने से रोक दिया है.
इधर, देवेंद्र नाथ महतो ने कहा है कि निशा भगत के आत्महत्या करने के दौरान जो फेसबुक पर वीडियो वायरल है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं. निशा भगत ने वीडियो में जमीन माफियाओं का भी उल्लेख किया है. इससे यह प्रतीत होता है कि यह घटना बेहद गंभीर है. इसकी सरकार उच्च स्तरीय जांच कराये.

निशा भगत के घर के बाहर पुलिस की तैनाती
गौरतलब है कि आदिवासी नेता निशा भगत ने अपने पिठौरिया स्थित घर पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है. जानकारी के मुताबिक उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या की है. आत्महत्या करने की घटना को उन्होंने फेसबुक पर लाइव भी किया. फेसबुक पर उनका लाइव वीडियो वायरल है. इस वीडियो में उन्होंने कई बातों की चर्चा की है. इससे हड़कंप मचा है.
इससे पहले शुक्रवार को घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. रिम्स के डॉक्टरों के मुताबिक इलाज के लिए जब उन्हें अस्पताल में लाया गया, उससे पहले ही उनका निधन हो चुका था. इस बीच इस घटना को लेकर पुलिस फेसबुक लाइव के वीडियो, फोन कॉल और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है.
इस बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने निशा भगत की आत्महत्या को लेकर पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की को जिम्मेवार ठहराया है. मरांडी ने आरोप लगाया कि कुछ दलाल आदिवासियों की जमीन हड़पने का प्रयास कर रहे हैं. राज्य के हर थाना और अंचल में जमीन लूट का खेल चल रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि आदिवासी समाज आखिर अपनी ही जमीन पर कब तक प्रताड़ित होता रहेगा.
मरांडी ने कहा कि आदिवासियों के हक-अधिकारों की आवाज उठाने वाली एक युवा महिला को इस हद तक प्रताड़ित होना पड़ा कि उसे अपनी जान देनी पड़ी. उन्होंने निशा भगत द्वारा जिम्मेवार ठहराए गए लोगों की शीघ्र गिरफ्तारी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा.
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