Search

 
 
 

अविश्वास प्रस्ताव, अध्यक्ष से परेशानी या मनमानी करने में रुकावट, रांची जिला परिषद में मचा घमासान!

रांची जिला परिषद की अध्यक्ष निर्मला भगत के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चिंगारी अब आग बनकर सामने आ गई है. सवाल ये है कि ये सच में जनप्रतिनिधियों की नाराजगी है
 

Manish Bhardwaj

Ranchi: रांची जिला परिषद की अध्यक्ष निर्मला भगत के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चिंगारी अब आग बनकर सामने आ गई है. सवाल ये है कि ये सच में जनप्रतिनिधियों की नाराजगी है या फिर टेंडर की मलाईदार लड़ाई?

 

 क्या है मामला?


रांची जिला परिषद की अध्यक्ष निर्मला भगत के खिलाफ पार्षदों ने उपायुक्त को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा है. उनका आरोप है कि अध्यक्ष मनमानी करती हैं, किसी की नहीं सुनतीं और फैसले अकेले ले लेती हैं. इसे लेकर कहा गया कि उन्होंने मजबूर होकर प्रस्ताव लाना पड़ा. मसले को गहराई से समझने की कोशिश की गई, तो मामला उल्टा दिखाई दिया.

Uploaded Image

 

सिर्फ बैठक के लिए हुआ था साइन, अब इस्तेमाल हो रहा अविश्वास प्रस्ताव में?


कुछ पार्षदों ने बताया कि करीब 8 महीने पहले एक बैठक के लिए सभी से साइन लिया गया था. उस वक्त जिला परिषद संघ के गठन की बात हो रही थी. अविश्वास प्रस्ताव का कोई जिक्र नहीं था. अब वही पुराने साइन का इस्तेमाल कर के अविश्वास प्रस्ताव दिखाया जा रहा है.

 

 निर्मला भगत का दावा - गलत तरीके से लाया जा रहा प्रस्ताव


निर्मला भगत ने 25 जून 2025 को खुद रांची डीसी को एक ज्ञापन सौंपा. उसमें बताया कि 21 में से 9 पार्षदों के साइन उनके पास हैं और कई पार्षदों ने यह भी कहा है कि उनसे धोखे से साइन लिए गए. इतना ही नहीं  28 जून को जब सभी पार्षदों को बुलाया गया, तब भी केवल 13 ही पहुंचे.

निर्मला भगत ने सवाल उठाया कि जब पर्याप्त संख्या में साइन नहीं हैं और साइन का तरीका भी गलत है, तो फिर इस प्रस्ताव को अब तक रद्द क्यों नहीं किया गया?

अब 7 जुलाई को फिर से सुनवाई तय की गई है ताकि फैसला लिया जा सके. अब असली सवाल: ये विरोध अध्यक्ष से है या टेंडर से?

सूत्रों की मानें तो अविश्वास प्रस्ताव की असली वजह कुछ और ही है, जिला परिषद के टेंडर. बताया जा रहा है कि कुछ पार्षद टेंडर को कुछ खास लोगों को देना चाहते थे और अध्यक्ष ने इस पर रोक लगा दी. निर्मला भगत चाहती थीं कि टेंडर की प्रक्रिया पारदर्शी हो, लेकिन जब वो दबाव में नहीं आईं, तभी से विरोध शुरू हो गया.

एक पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असल में बात टेंडर की है. अध्यक्ष पर दबाव बनाया गया था कि टेंडर कुछ चुनिंदा लोगों को दिया जाए. लेकिन जब उन्होंने साफ मना कर दिया, तभी ये अविश्वास प्रस्ताव का खेल रचा गया.

कुछ पार्षद दबाव बनाकर अपना स्वार्थ साधना चाहते हैं जो कि अध्यक्ष होने नहीं देती है. अध्यक्ष के द्वारा सभी पार्षदों को समान रूप से सम्मान देना कुछ पार्षदों को पसंद नहीं आ रहा है.


एक पुराने पार्षद हैं जो सदस्यों को बरगला कर उन्हें दिग्भ्रमित करते रहते हैं ताकि वो अपना उल्लू सीधा कर सके. परंतु अध्यक्ष के सभी सदस्यों के प्रति समान भाव इसमें रुकावट लाती है.

 

अब देखना ये होगा


अब 7 जुलाई की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं.

क्या पार्षदों के पास सच में बहुमत है?

क्या साइन वाकई धोखे से लिए गए थे?

 

और सबसे बड़ी बात – ये जनहित का मसला है या ठेके का खेल?

रांची जिला परिषद में लोकतंत्र के नाम पर खेल हो रहा है या पारदर्शिता की लड़ाई, इसका फैसला आने वाला वक्त करेगा. लेकिन जो तस्वीर उभर रही है, वो निश्चित ही बेहद चौंकाने वाली है.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही