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कानून के शिकंजे से कोई नहीं बच पाएगा, सबका जेल जाना तय है : बाबूलाल

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि हाईकोर्ट ने ईडी के विरुद्ध रांची पुलिस द्वारा की जा रही कारवाई पर रोक लगाते हुए, ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय की सुरक्षा केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट का आदेश जांच एजेंसियों की कार्रवाई प्रभावित करने वालों पर करारा तमाचा है. 


कहा कि पुलिस के सहारे जांच एजेंसियों को डराने-धमकाने की चाहे जितनी कोशिश कर लीजिए, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई रुकने वाली नहीं है. घोटाले और षड्यंत्र में शामिल पूरा कुनबा कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा, सबका जेल जाना तय है. समय का इंतजार करिए.

 

डीजीपी नियुक्ति पर भी उठाए सवाल


नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का हवाला देकर झारखंड में डीजीपी नियुक्ति नियमावली में संशोधन किया. तर्क दिया गया कि राज्य में अनुभवी पुलिस प्रमुख की नियुक्ति अनिवार्य है. 


लेकिन कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण डीजीपी पद पर चयन के लिए उपलब्ध नहीं हैं. गृह विभाग द्वारा नियमावली में अधिकारियों की अनुपलब्धता का जो आधार बताया गया है, वह पूरी तरह भ्रामक है. 


झारखंड कैडर के वरिष्ठ आइपीएस नहीं हैं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर


वास्तविकता यह है कि झारखंड कैडर के डीजी रैंक के तीन वरिष्ठ अधिकारी अनिल पालटा, प्रशांत सिंह और एम.एस. भाटिया में से कोई भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं है. इन तीनों अधिकारियों की सेवा अवधि भी क्रमशः एक वर्ष, दो वर्ष और तीन वर्ष शेष है. इसके बावजूद सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले वरीयता क्रम में उनसे कनिष्ठ अधिकारी को डीजीपी नियुक्त कर दिया गया.


नियुक्ति प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले का उल्लंघन


यह नियुक्ति प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले का उल्लंघन है, क्योंकि यूपीएससी के पैनल से चयन नहीं किया गया. दूसरा तथ्य यह भी है कि राज्य सरकार द्वारा स्वयं बनाई गई डीजीपी नियुक्ति नियमावली के वरीयता क्रम का पालन नहीं किया गया. 
डीजीपी पूरे राज्य के पुलिस बल का मुखिया होता है. उसकी नियुक्ति में ही पक्षपात और नियमों की अवहेलना किया जाना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, ट्रांसफर पोस्टिंग में लेनदेन को बढ़ावा देता है.


अनुराग गुप्ता के मामले में हम सबने देखा है


अनुराग गुप्ता के मामले में हम सबने देखा है. उनकी नियुक्ति के लिए सारे कायदे कानूनों को ताक पर रख दिया गया. एसीबी और सीआईडी का प्रभार सौंप कर अपने खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार की जांच को प्रभावित कराया, लेकिन अनुराग गुप्ता ने ही ऐसी प्रतिकूल स्थिति खड़ी कर दी कि अंततः रातों-रात उन्हें हटाना पड़ा. उन्होंने सीएम से कहा है कि संवैधानिक प्रावधानों और कोर्ट के दिशा निर्देशों का सम्मान कीजिए.

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