Jharkhand News : झारखंड में साइबर अपराध का दायरा अब जामताड़ा तक सीमित नहीं रह गया है. देशभर में साइबर ठगी से जुड़े आंकड़ों में राज्य के कई अन्य जिलों के नाम भी सामने आए हैं.
अगस्त 2026 में हुई केंद्र सरकार की प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान जारी सूची के मुताबिक, देवघर, दुमका, गिरिडीह और धनबाद साइबर अपराध से जुड़े अलग-अलग मानकों पर देश के शीर्ष 15 जिलों में शामिल हैं.
देवघर देश में तीसरे स्थान पर
रिपोर्ट के अनुसार साइबर अपराध के सर्वाधिक मामले दर्ज होने के आधार पर देवघर देश में तीसरे स्थान पर है. इस सूची में दुमका को 14वां स्थान मिला है.
वहीं, साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी सिम कार्ड जारी करने के मामले में गिरिडीह देशभर में 10वें स्थान पर है.
ठगी की रकम एटीएम के माध्यम से निकालने से जुड़े मामलों में धनबाद 13वें स्थान पर दर्ज किया गया है.
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फर्जी सिम और किराये के बैंक खातों का इस्तेमाल
साइबर अपराधी ठगी के लिए फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर सिम कार्ड हासिल करते हैं. कई मामलों में दूसरे लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर मोबाइल कनेक्शन लिए जाते हैं. इसके बाद इन्हीं नंबरों के जरिए लोगों को फोन कर या डिजिटल माध्यमों से ठगी की जाती है.
ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजा जाता है. इसके लिए किराये पर उपलब्ध कराए जाने वाले बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया जाता है. बाद में एटीएम और चेक के जरिए पैसे निकाल लिए जाते हैं. ऐसे नेटवर्क में सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले, बैंक खाते मुहैया कराने वाले और रकम निकालने वाले अलग-अलग लोग शामिल हो सकते हैं.
बिहार के जिले भी सूची में
साइबर अपराध के मामलों में बिहार के नवादा को देश में दूसरा, नालंदा को चौथा और पटना को नौवां स्थान दिया गया है. फर्जी सिम कार्ड जारी करने से जुड़े मामलों में नालंदा दूसरे और अरवल चौथे स्थान पर है. वहीं, ठगी की रकम निकालने के मामलों में कोलकाता पहले और पटना दूसरे स्थान पर दर्ज है. किराये के बैंक खातों के जरिए रकम निकालने के मामले में पटना नौवें स्थान पर है.
साइबर ठगी के इन नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने अपराधियों की पहचान करने, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का पता लगाने और रकम के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने की चुनौती है.
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