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अब स्कूल, सड़क व आंगनबाड़ी के लिए नहीं चाहिए वन मंजूरी: जनजातीय मंत्रालय का बड़ा फैसला

Pravin Kumar

Ranchi: जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 की धारा 3(2) के तहत यदि ग्रामसभा सिफारिश करती है, तो वन भूमि पर स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी जैसे निर्माण कार्यों के लिए अब वन्यजीव मंजूरी जरूरी नहीं है. यह निर्णय देशभर के आदिवासी और वनवासी इलाकों के लिए राहत भरी है. लेकिन झारखंड के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.


झारखंड को मिलेगा सीधा लाभ


झारखंड में बड़ी संख्या में गांव वन क्षेत्रों के भीतर या सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे हैं, जहां भूमि की कमी के कारण स्कूल, आंगनबाड़ी, सड़क और अस्पताल जैसी जरूरी सुविधाओं के निर्माण पर वन विभाग ने रोक लगा रखी थी.अब मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण से ये बाधाएं हट जाएंगी और सुदूर, पिछड़े आदिवासी गांवों में विकास की रफ्तार तेज हो सकेगी.

 

ग्राम सभा की सिफारिश ही काफी


मंत्रालय ने 2 जुलाई को जारी कार्यालय ज्ञापन में कहा कि FRA की धारा 3(2) के तहत, यदि ग्राम सभा विकास परियोजना की सिफारिश करती है तो अलग से वन्यजीव मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी. यह संवैधानिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ई) और 21 पर आधारित है.

 

 पहले क्या हो रहा था?


2020 में पर्यावरण मंत्रालय ने एक पत्र में कहा था कि FRA के तहत भी वन्यजीव मंजूरी जरूरी होगी.
इसका हवाला देकर वन अधिकारी स्कूल-सड़क जैसी योजनाएं रोक रहे थे, जिससे झारखंड के कई आदिवासी गांवों को जरूरी सेवाओं से वंचित रहना पड़ा. कई मामलों में तो ग्रामसभा और जिला स्तर की मंजूरी के बावजूद परियोजनाएं रुकी रहीं.

 

अब क्या बदलेगा?


•    झारखंड के वन क्षेत्रों में योजनाएं शुरू की जा सकेंगी.
•    आदिवासी गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना आसान होगा.
•    वन अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगेगी.
•    ऐतिहासिक अन्याय की भरपाई की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है.

 

 क्या है FRA की धारा 3(2)?


•    यह धारा कहती है कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के बावजूद केंद्र सरकार स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, सड़क, बिजली, सिंचाई जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए वन भूमि के डायवर्जन की इजाजत दे सकती है.
•    शर्त केवल इतनी है कि ग्राम सभा इसकी सिफारिश करे.
•    इसके लिए अलग से वन्यजीव मंजूरी की जरूरत नहीं है.

 

क्या था विवाद?


•    2020 में पर्यावरण मंत्रालय ने एक पत्र जारी कर कहा था कि FRA की धारा 3(2) लागू करने के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत मंजूरी जरूरी है.
•    इस पत्र के आधार पर कई वन अधिकारियों ने स्कूल, सड़क जैसी परियोजनाएं रोक दीं, चाहे ग्राम सभा ने सिफारिश की हो या जिला समिति ने मंजूरी दी हो.

 

जनजातीय मंत्रालय का स्पष्ट जवाब


•    2 जुलाई को जारी कार्यालय ज्ञापन में जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने कहा कि धारा 3(2) एक संवैधानिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ई), 21 और पांचवीं व छठी अनुसूचियों पर आधारित है.
•    मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (समाथा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य, टीएन गोदावर्मन केस) का हवाला देते हुए कहा कि यह अधिनियम आदिवासी अधिकारों और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने के लिए है.


वन्यजीव संरक्षण पर क्या कहा गया?


•    मंत्रालय ने कहा कि FRA की धारा 4(2) पहले से ही बताती है कि केवल विशेष वन्यजीव आवासों में वन अधिकारों को सीमित किया जा सकता है.
•    सामान्य हालात में जब ग्राम सभा ने स्वीकृति दी हो, तो वन्यजीव मंजूरी की जरूरत नहीं है.

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