Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि 4 अगस्त केवल पुण्यतिथि नहीं, बल्कि झारखंड के लिए आत्ममंथन और संकल्प का दिन है. शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और समाज के कमजोर लोगों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया.
केशव महतो कमलेश ने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष की मिसाल था. उनके पिता सोबरन सोरेन महाजनी प्रथा और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ लड़ते हुए मारे गए. इसके बाद शिबू सोरेन ने अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया और लोगों के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाया.
उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने राजनीति को कभी सत्ता पाने का जरिया नहीं माना. उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया और जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन चलाया. इसी संघर्ष के कारण लोग उन्हें सम्मान से "दिशोम गुरु" कहने लगे.
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन बहुत सादा था. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे आम लोगों के बीच रहते थे और उनकी समस्याएं सुनते थे. वे मानते थे कि जनता का नेता वही है जो जनता के बीच रहकर उनकी तकलीफ समझे.
केशव महतो कमलेश ने कहा कि उन्हें कई बार शिबू सोरेन से मिलने और उनका मार्गदर्शन पाने का अवसर मिला. उन्होंने कहा कि गुरुजी सभी लोगों से बराबरी का व्यवहार करते थे और हमेशा कार्यकर्ताओं का सम्मान करने की बात कहते थे.
उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में शिबू सोरेन की बड़ी भूमिका रही. वर्षों तक उन्होंने कठिन परिस्थितियों में आंदोलन का नेतृत्व किया. उनके लंबे संघर्ष के बाद 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बना.
केशव महतो कमलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी शिबू सोरेन ने आदिवासियों, किसानों, शिक्षा, ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्राथमिकता दी. उनका सपना था कि झारखंड केवल खनिज संपदा के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा, विकास और सामाजिक समानता के लिए भी जाना जाए.
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में भारत सरकार ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण देकर उनके योगदान का सम्मान किया. यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि झारखंड के लंबे जनसंघर्ष का सम्मान है.
अंत में केशव महतो कमलेश ने कहा कि शिबू सोरेन को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब लोग उनके आदर्शों पर चलें, समाज के कमजोर वर्गों की सेवा करें और झारखंड की संस्कृति, सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने का काम करें. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन भले आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और उनका संघर्ष हमेशा लोगों को प्रेरित करते रहेंगे.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment