ईडी की जांच में आए तथ्यों के आधार पर दर्ज हुआ मामला
ईडी के द्वारा बीरेंद्र राम, चार्टर्ड अकाउंटेंट मुकेश मित्तल और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 465, 466, 468, 471, 473, 474, 476, 484 और 120 बी के तहत दर्ज की गई थी. टेंडर घोटाले की जांच कर रहे ईडी को बीरेंद्र राम और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के उद्देश्य से इस्तेमाल किए गए फर्जी नामों पर बैंक खाते खोलने के लिए पैन कार्ड बनाने समेत कई आपत्तिजनक सबूत मिले. निष्कर्षों के मद्देनजर में ईडी ने दिल्ली पुलिस ने बीरेंद्र राम और अन्य के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज की है. इसे पढ़ें- कोल">https://lagatar.in/ed-raids-for-22-hours-in-hazaribagh-in-coal-linkage-case/">कोललिंकेज मामले में हजारीबाग में चली 22 घंटे तक ईडी की छापेमारी
जाली आईडी और केवाईसी दस्तावेज बनाए
जांच से पता चला कि नई दिल्ली में रोहिणी निवासी तारा चंद ने तीन अलग-अलग प्रोपराइटरशिप फर्मों श्री खाटूश्याम ट्रेडर्स, अनिल कुमार गोविंद के नाम पर तीन बैंक खाते खोलने के लिए एक फर्जी इकाई सचिन गुप्ता के नाम पर जाली आईडी और केवाईसी दस्तावेज बनाए. राम ट्रेडर्स और ओम ट्रेडर्स, जिनका उपयोग बीरेंद्र राम के अवैध धन को रूट करने के लिए किया गया था. तारा चंद ने दिल्ली के चार्टर्ड अकाउंटेंट नीरज मित्तल के निर्देश पर ऐसा किया. बीरेंद्र राम ने मुकेश मित्तल की मदद से अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर कमाए गए अवैध धन को अपने परिवार के सदस्यों के खातों में डाल दिया. यह पाया गया कि बीरेंद्र राम के परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में पहले संयुक्त खाते (एनएसई शाखा, नई दिल्ली में बनाए गए, केनरा बैंक 2577257010412) में बीरेंद्र राम की पत्नी राजकुमारी के नाम से बड़ी रकम जमा की गई थी. वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2018-19 की अवधि के दौरान उनके खाते में 9.30 करोड़ जमा किए गए, और फिर बैंक खाते में (केनरा बैंक 127000628767, गेंदा राम के नाम से एसएमई नारायणा विहार शाखा में बनाए गए 4.48 करोड़ रुपये) 22 दिसंबर से 23 जनवरी के बीच 31-32 दिनों की अवधि में गेंदा राम बीरेंद्र राम के पिता हैं. इसे भी पढ़ें- नक्सल">https://lagatar.in/59-personnel-of-bomb-disposal-squad-engaged-in-anti-naxal-operation-will-be-insured-for-55-lakhs/">नक्सलविरोधी अभियान में लगे बम निरोधक दस्ते के 59 कर्मियों का होगा 55 लाख का बीमा

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