Search

विश्व पर्यावरण दिवस पर CUJ ने कांके डैम में चलाया स्वच्छता व जागरूकता अभियान

Ranchi : विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से कांके डैम में व्यापक स्वच्छता एवं जागरूकता अभियान आयोजित किया. चार दिवसीय पर्यावरण कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत हुए इस आयोजन में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, विश्वविद्यालय कर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.

 

 

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सारंग मेढेकर के संरक्षण, स्कूल ऑफ नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट के डीन प्रो. मनोज कुमार के मार्गदर्शन और पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाना भी रहा.

 

सुबह 6 बजे शुरू हुए अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने कांके डैम परिसर से प्लास्टिक, पॉलीथीन, बोतलें, कागज और अन्य अपशिष्ट सामग्री एकत्र कर क्षेत्र की साफ-सफाई की. इस दौरान मॉर्निंग वॉक के लिए पहुंचे लोगों से संवाद कर उन्हें जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा न फैलाने का संदेश दिया गया.

 

अभियान में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है. उपस्थित लोगों ने स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प भी लिया.

 

कार्यक्रम में पर्यावरण विज्ञान विभाग के तकनीकी कर्मी लव कुमार मंडल, दीपक कुमार ठाकुर, नरेंद्र राय और विद्याधर सेठ, विश्वविद्यालय के जूनियर इंजीनियर मनोज महतो और सांख्यिकीय सहायक रविकांत ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

 

सफाई कर्मियों को मिला वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का प्रशिक्षण

स्वच्छता अभियान के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सफाई कर्मियों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और कचरा पृथक्करण पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया. प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया से परिचित कराना और परिसर को अधिक स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाना था.

 

डॉ. भास्कर सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण आधार है. उन्होंने गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने के लाभों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इससे पुनर्चक्रण प्रक्रिया आसान होती है और पर्यावरणीय प्रभाव कम होते हैं.

 

प्रशिक्षण में विभिन्न रंगों के डस्टबिनों के उपयोग की जानकारी भी दी गई. प्रतिभागियों को हरा डस्टबिन जैव-अवक्रमणीय कचरे, नीला पुनर्चक्रण योग्य सामग्री, लाल जोखिमयुक्त अपशिष्ट और काला अन्य अवशिष्ट कचरे के लिए उपयोग करने का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया.

 

कार्यक्रम के आयोजन में डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. अनुराग लिंडा, एनएसएस समन्वयक डॉ. ऋषिकेश महतो, शोधार्थियों और विभागीय टीम ने सक्रिय योगदान दिया.

 

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज वैश्विक आवश्यकता है और ऐसे अभियान समाज में व्यवहारिक बदलाव तथा सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

 

 

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

बेहतर न्यूज़ अनुभव
ब्राउज़र में ही
//