New Delhi : पीएम मोदी ने सोमनाथ के ऐतिहासिक मंदिर पर हमले के 1000 साल पूरे होने पर एक लेख लिखा है. सोमनाथ मंदिर पर आक्रांता महमूद गजनी ने 1026 ई. यानी आज से ठीक एक हजार साल पहले हमला किया था और लूटपाट की थी.
Prime Minister Narendra Modi to visit Somnath on 11th January to participate in the Somnath Swabhiman Parv, in which many spiritual and social activities will take place from 8th to 11th January. pic.twitter.com/kUi9uHtRrZ
— ANI (@ANI) January 5, 2026
जय सोमनाथ!
— Narendra Modi (@narendramodi) January 5, 2026
वर्ष 2026 में आस्था की हमारी तीर्थस्थली सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है! सोमनाथ दरअसल भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है,…
भारत की आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया था. पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने लेख में लिखा है कि मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल को श्रेय जाता है. उन्होंने अपने लेख में सोमनाथ मंदिर निर्माण में पंडित जवाहर लाल नेहरू की आलोचना की है.
उन्होंने लिखा कि सोमनाथ शब्द सुनते ही दिल और दिमाग में गर्व की भावना पैदा होती है. जान लें कि पीएम मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लेने के लिए सोमनाथ की यात्रा करेंगे. सोमनाश में 8 से 11 जनवरी तक कई आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम होंगे.
पीएम मोदी ने लिखा कि 2026 में आस्था की हमारी तीर्थस्थली सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं. बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है.
सोमनाथ दरअसल भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है, जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सदैव सर्वोपरि रही है.
पीएम ने लिखा कि सभी जानते हैं कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया. उन्होंने अपना दायित्व निभाया. 1947 में दीवाली पर वे उनकी सोमनाथ पहुंचे.
श्री मोदी ने लिखा कि उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें(पटेल) भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा. निर्माण के बाद 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गये. उद्घाटन अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद वहां उपस्थित थे..
पीएम मोदी ने लिखा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे. वो नहीं चाहते थे कि राष्ट्रपति और केंद्र के मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें. पंडित नेहरू ने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी. लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे.
पीएम मोदी के अनुसार सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख केएम मुंशी जी के योगदानों को याद किये बिना अधूरा है. उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी समर्थन किया था. उनकी पुस्तक सोमनाथ, द श्राइन इटरनल.. अवश्य पढ़ी जानी चाहिए. जैसा कि मुंशी जी की पुस्तक के शीर्षक से स्पष्ट होता है.
हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो आत्मा और विचारों की अमरता में अटूट विश्वास रखती है. हम विश्वास करते हैं- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः. सोमनाथ का भौतिक ढांचा नष्ट हो गया, लेकिन उसकी चेतना अमर रही.
पीएम मोदी ने लिखा कि इन्हीं विचारों ने हमें हर कालखंड में, हर परिस्थिति में फिर से उठ खड़े होने, मजबूत बनने और आगे बढ़ने का सामर्थ्य दिया है. इन्हीं मूल्यों संकल्प की वजह से आज भारत पर पूरी दुनिया की नजर है. दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है. वो हमारे इनोवेटिव युवाओं में निवेश करना चाहती है.
हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारा संगीत और हमारे अनेक पर्व आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं. योग और आयुर्वेद जैसे विषय पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रहे हैं. ये स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दे रहे हैं. आज कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है.
पीएम मोदी ने लिखा कि महमूद गजनी द्वारा किये गये 1026 के पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद आज 2026 में भी सोमनाथ का समुद्र उसी तीव्रता से गरजता है और तट को स्पर्श करती लहरें उसकी पूरी गाथा सुनाती हैं.
उन लहरों की तरह सोमनाथ बार-बार उठता रहा है. अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं. उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है. इतिहास के पन्नों में वे केवल फुटनोट हैं, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है.
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