Ranchi News: भाकपा माले ने तत्कालीन निरसा विधायक कॉ. गुरुदास चटर्जी के हत्यारे उमेश सिंह की समयपूर्व रिहाई के फैसले को निरस्त कराने की मांग हेमंत सरकार से की है. पार्टी ने राज्य सरकार से इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए तत्काल कानूनी पहल करने की अपील की है.
भाकपा माले का कहना है कि मजदूरों, गरीबों और न्याय के लिए संघर्ष करने वाले जननेताओं की हत्या के दोषियों की रिहाई से गलत संदेश जाएगा. इससे ऐसी आपराधिक ताकतों का मनोबल बढ़ेगा. पार्टी ने आरोप लगाया कि इससे पहले तत्कालीन रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में पुनरीक्षण समिति ने उमेश सिंह को राहत देकर उसकी समयपूर्व रिहाई का रास्ता साफ किया था.
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पार्टी ने कहा कि कॉ. गुरुदास चटर्जी आदिवासियों और दलितों की जमीन हड़पने की साजिशों के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे थे. वे मजदूर आंदोलन के साथ झारखंड आंदोलन के भी प्रमुख नेताओं में शामिल थे. बिहार विधानसभा से लेकर सड़क तक उन्होंने गरीबों और मजदूरों की आवाज बुलंद की थी.
भाकपा माले के अनुसार, कॉ. ए.के. राय, कॉ. गुरुदास चटर्जी और कॉ. महेंद्र सिंह के नेतृत्व में चले जनआंदोलनों ने कोयलांचल में माफिया और सामंती ताकतों को चुनौती दी थी. इसी संघर्ष को दबाने के लिए झारखंड राज्य गठन से ठीक पहले 14 अप्रैल 2000 को दोपहर करीब तीन बजे माफिया ताकतों ने कॉ. गुरुदास चटर्जी की हत्या कर दी थी.
पार्टी ने उमेश सिंह की रिहाई पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे कोयलांचल क्षेत्र में गरीबों, आदिवासियों और दलितों के खिलाफ दमन एवं हिंसा की घटनाएं बढ़ने की आशंका है. भाकपा माले ने यह भी कहा कि इससे पहले शिवशंकर सिंह की रिहाई भी हो चुकी है.
भाकपा माले राज्य कमिटी ने हेमंत सरकार से मांग की है कि वह उच्च न्यायालय में उमेश सिंह की समयपूर्व रिहाई के फैसले को चुनौती देकर इसे निरस्त कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए.
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