New Delhi : कार्तिकेय दीपम से जुड़ा मामला फिर सुर्खियों में है. आज मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कार्तिकेय दीपम से जुड़े मामले में सिंगल बेंच के आदेश पर मुहर लगा दी.
"DMK has consistently berated, derided and attacked Sanatan Dharma": Piyush Goyal on Madras HC's verdict on Deepathoon issue
— ANI Digital (@ani_digital) January 6, 2026
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इस फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इंडिया गठबंधन पर करारा हमला बोला है. श्री गोयल ने आज के फैसले पर कहा कि अदालत ने राज्य सरकार द्वारा कानून व्यवस्था बिगड़ जाने का तर्क पूरी तरह खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने इसे एक काल्पनिक डर करार दिया, जो प्रशासन ने खुद गढ़ा था.
इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री ने डीएमके और कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और एंटी हिंदू सोच रखने का आरोप लगाया.
उन्होंने मदुरै बेंच के फैसले को लेकर कहा कि जस्टिस जीजे चंद्रन और जस्टिस केके रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलन से जुड़े मामले में साफ कर दिया कि यह सदियों पुरानी परंपरा है.
कोर्ट ने स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और दीप प्रज्वलन की अनुमति देने के आदेश जारी किये हैं. पीयूष गोयल ने कहा कि इंडिया गठबंधन की राजनीति का असली चेहरा अब सामने आ गया है. सिंगल बेंच के आदेश के बाद न्यायपालिका के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव से यह साफ झलकता है.
पीयूष गोयल ने कहा कि न्यायमूर्ति टीआर स्वामीनाथन के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव झूठे और निराधार आरोपों पर आधारित है. एक न्यायिक फैसले के कारण न्यायाधीश को एंटी सेक्युलर करार देना और किसी खास व्यक्ति, समुदाय या विचारधारा के पक्ष में झुकाव का आरोप लगाना पूरी तरह असत्य है
पीयूष गोयल ने कहा कि यह लोकतंत्र और संविधान दोनों के लिए खतरनाक संकेत है. मामला यह है कि पूर्व में कार्तिकेय दीपम से जुड़े मामले में न्यायमूर्ति टीआर स्वामीनाथन की सिंगल बेंच ने तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर परंपरानुसार दीप जलाने का आदेश दिया था, जिस पर आज डबल बैंच ने स्टालिन सरकार को फटकार लगाते हुए मुहर लगा दी.
याद करें कि इंडिया गठबंधन में शामिल दलों ने न्यायमूर्ति टीआर स्वामीनाथन पर महाभियोग लाने का प्रस्ताव उस समय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को दिया था.
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इंडिया गठबंधन की नीति है कि अगर अदालत का फैसला उनके पक्ष में नहीं आता, तो उस संवैधानिक संस्था पर सीधा हमला करे.
पीयूष गोयल ने कहा कि संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाकर न्यायाधीशों की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करना न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश है. यह प्रस्ताव उन न्यायाधीशों को डराने का प्रयास है, जिनके फैसले कुछ राजनीतिक दलों को स्वीकार्य नहीं.
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