Ranchi : थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, हीमोफीलिया और अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों ने बुधवार को झारखंड राज्य निःशक्तता आयुक्त कीर्तिश्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं. यह प्रतिनिधिमंडल झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन और लहू बोलेगा रक्तदान संगठन के नेतृत्व में पहुंचा था.
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ये सभी बीमारियां दिव्यांगता अधिकार अधिनियम (RPW Act 2016) के तहत दिव्यांगता की श्रेणी में शामिल हैं. इसके बावजूद झारखंड में पीड़ितों को अपेक्षित अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. फिलहाल अधिकांश लाभ केवल दिव्यांगता पेंशन तक सीमित हैं.
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार झारखंड के 24 जिलों में इन बीमारियों से पीड़ित 11 हजार से अधिक मरीज हैं. संख्या के मामले में झारखंड देश में छत्तीसगढ़ के बाद दूसरे स्थान पर है. इसके बावजूद मरीजों के लिए नीतियों और उनके क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है.
प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त से मांग की कि स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, परिवहन, रेलवे, रोजगार और अन्य विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं ताकि मरीजों को इलाज, दवाएं, जांच, छात्रवृत्ति, पेंशन, राशन कार्ड, यात्रा रियायत और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके.
उन्होंने राज्य स्तर पर जागरूकता अभियान, सेमिनार और सम्मेलन आयोजित करने की भी मांग की. साथ ही तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की तर्ज पर इन रोगियों के लिए 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग उठाई. प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि वर्तमान में मिलने वाली 1 हजार रुपये की दिव्यांगता पेंशन भी पिछले तीन महीने से नहीं मिली है.
निःशक्तता आयुक्त कीर्तिश्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि मांगों पर संबंधित विभागों और अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे.
प्रतिनिधिमंडल में नदीम खान, संजय टोप्पो, सुरंजन बाड़ा, संजय महतो, सुरती देवी, देवकी देवी, सीमा देवी, सुजाता कुमारी, बिमला कच्छप, संगीता कुमारी, लीला देवी, माजिदन खातून, शांति देवी और अनीश टोप्पो शामिल थे.
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