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पलामूः एनपीयू में करोड़ों के घोटाले का आरोप, आपसू ने खोली भ्रष्टाचार की परतें

वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने बताया कि राज्यपाल ने पूरे मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है. रिटायर्ड शिक्षकों का लंबित पेंशन भुगतान कर दिया गया है, कुलपति को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है. साथ पूरे प्रकरण की जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की जाएगी.
 
प्रेसवार्ता में जानकारी देते आपसू के छात्र नेता.

Medininagar : अखिल पलामू छात्र संघ (आपसू) ने नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू), मेदिनीनगर में गंभीर वित्तीय व शैक्षणिक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. आपसू से जुड़े छात्र नेताओं ने शनिवार को प्रेसवार्ता कर विवि में भ्रष्टाचार से संबंधित कई अहम दस्तावेज मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए. प्रेसवार्ता में दूरभाष से झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर भी शामिल हुए. उन्होंने कहा कि रिटायर्ड शिक्षकों व आपसू प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय में अनियमितताओं से संबंधित जानकारी उन्हें उपलब्ध कराई थी. इसके आलोक में उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर आपसू की मांगों को रखा है.

वित्त मंत्री ने बताया कि राज्यपाल ने पूरे मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है. रिटायर्ड शिक्षकों का लंबित पेंशन भुगतान कर दिया गया है, कुलपति को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है. साथ पूरे प्रकरण की जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

एनपीयू बना भ्रष्टाचार का अड्डा : राहुल दुबे

आपसू के केंद्रीय संयोजक राहुल कुमार दुबे ने कहा कि नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है. उन्होंने राज्य की कर अपर आयुक्त कंचन लाल के नेतृत्व में की गई जांच की रिपोर्ट के आधार पर स्मार्ट पैनल खरीद घोटाले का खुलासा किया. दस्तावेज़ दिखाते हुए बताया कि स्मार्ट पैनल खरीद के लिए किए गए अनुबंध में विश्वविद्यालय का पता निमीयां दर्शाया गया है, जबकि पिन कोड 822110 अंकित है, जो चैनपुर का है. जबकि विश्वविद्यालय मेदिनीनगर में स्थित है. उन्होंने सवाल उठाया कि पता और पिन कोड में इस तरह का बदलाव क्यों किया गया. 

22 लाख का सामान 78 लाख में खरीदा गया

आपसू ने आरोप लगाया कि 7 जून 2025 को KKAPSSN Ventures Private Limited, कटक द्वारा IFP Viewsonics-IN7501 स्मार्ट पैनल की सप्लाई श्री गणपति इंटरप्राइजेज, रेड़मा चौक को की गई. 20 स्मार्ट पैनल की कुल कीमत 22,30,200 थी. जबकि वही पैनल एनपीयू को 78,30,000 में बेचा गया. इस प्रकार रेड़मा चौक से विश्वविद्यालय तक 56 लाख का अंतर दर्शाया गया, जो गंभीर वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है.

जीएसटी दरों में हेरफेर का भी आरोप

आपसू नेताओं ने बताया कि 27 मई 2025 के इनवॉइस में जीएसटी 28 प्रतिशत दर्शाते हुए 20 पैनलों की कीमत 6117187 रुपए बताई गई. वहीं, 9 जून 2025 के इनवॉइस में जीएसटी घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई और पैनलों की कीमत 66,35,593 रुपए दिखाई गई. इस तरह 597203 का अंतर होने के कारण संदेह और गहराता है.

 

ऑफलाइन भुगतान और नियम उल्लंघन पर सवाल

आपसू ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान ऑफलाइन क्यों किया गया, जबकि नियमों के अनुसार ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी. साथ ही आरोप लगाया गया कि जेटीसी नियम 334 के तहत 24 माह तक अप्रयुक्त बजट को बिना वित्त विभाग की अनुमति खर्च नहीं किया जा सकता. बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करते हुए भुगतान किया. आपसू ने कुल दस से अधिक वित्तीय एवं शैक्षणिक अनियमितताओं का खुलासा करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.मौके पर आपसू के जिला उपाध्यक्ष कुणाल किशोर, विश्वविद्यालय संयोजक शालिनी अग्रवाल, जेएस संयोजक राज नेहा चौबे, जेएस अध्यक्ष सानिया अग्रवाल, महासचिव प्रिया, प्रसार प्रमुख प्रियांशु दुबे सहित अन्य मौजूद थे.


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