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पलामू : 14 साल पुराने रिश्वत मामले में तत्कालीन आपूर्ति पदाधिकारी को 5 साल की सजा

Medininagar News : अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत भी रमेश चंद्र प्रसाद को चार वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
 
व्यवहार न्यायालय पलामू (फाइल फोटो)

 Medininagar News :  पलामू जिला व्यवहार न्यायालय की एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष अदालत ने करीब 12 साल पुराने रिश्वत मामले में तत्कालीन विश्रामपुर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी रमेश चंद्र प्रसाद को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. विशेष न्यायाधीश राज कुमार मिश्र की अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d) के तहत आरोपी को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी है. अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा.

 

अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत भी रमेश चंद्र प्रसाद को चार वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

 

 

मामला वर्ष 2014 का है. विश्रामपुर निवासी मोनीर आलम ने तत्कालीन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी रमेश चंद्र प्रसाद के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि खाद्यान्न उठाव की अनुमति देने के एवज में आरोपी प्रति क्विंटल 10 रुपये की रिश्वत मांगता था. शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रतिदिन करीब तीन से चार क्विंटल खाद्यान्न का उठाव होता था और इसके लिए अवैध राशि की मांग की जाती थी.

 

शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामले की जांच शुरू की. 17 अक्टूबर 2014 को शिकायतकर्ता से तीन हजार रुपये रिश्वत की मांग किए जाने के बाद ब्यूरो की टीम ने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में जाल बिछाया. शिकायतकर्ता ने जैसे ही आरोपी को तीन हजार रुपये दिए, निगरानी ब्यूरो की टीम ने रमेश चंद्र प्रसाद को रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया.

 

गिरफ्तारी के बाद आरोपी के दोनों हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाया गया. इस दौरान घोल का रंग गुलाबी हो गया, जिसे अभियोजन पक्ष ने रिश्वत लेने के साक्ष्य के तौर पर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया.

 

इस मामले में निगरानी रांची थाना कांड संख्या 33/2014, दिनांक 15 अक्टूबर 2014 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. अदालत ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर रमेश चंद्र प्रसाद को दोषी पाया और सजा सुनाई. आरोपी के खिलाफ विजिलेंस केस नंबर 44/2014 के तहत सुनवाई हुई.

 

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