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पलामूः 25 करोड़ में बना पॉलिटेक्निक कॉलेज बेकार,एक दशक बाद भी पढ़ाई का इंतजार

लेस्लीगंज प्रखंड स्थित इस पॉलिटेक्निक कॉलेज के भवन का निर्माण वर्ष 2016-17 में पूरा हो गया था. कॉलेज परिसर में शैक्षणिक भवन, प्रशासनिक कक्ष, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय व अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया था. उद्देश्य यह था कि जिले के छात्रों को अपने ही क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा की सुविधा मिल सके.
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Medininagar : पलामू जिले के लेस्लीगंज प्रखंड के बसौरा में बने पॉलिटेक्निक कॉलेज में एक दशक बाद भी पढ़ाई नहीं शुरू हो सकी है. सरकार ने करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से इस कॉलेज के भवन का निर्माण कराया था. निर्माण के 10 वर्ष बाद भी यहां शैक्षणिक गतिविधियां शुरू नहीं हो सकी हैं. इससे जिले के छात्रों में मायूसी है. करोड़ों रुपये की लागत से बना भवन बेकार पड़ा है.

 

 

जानकारी के अनुसार, लेस्लीगंज प्रखंड स्थित इस पॉलिटेक्निक कॉलेज के भवन का निर्माण वर्ष 2016-17 में पूरा हो गया था. कॉलेज परिसर में शैक्षणिक भवन, प्रशासनिक कक्ष, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय व अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया था. उद्देश्य यह था कि जिले के छात्रों को अपने ही क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा की सुविधा मिल सके. लेकिन अब तक यहां पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है.

 

हर साल करीब 240 छात्रों के नामांकन की थी योजना

 

इस पॉलिटेक्निक कॉलेज में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल व कंप्यूटर इंजीनियरिंग जैसे डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना थी. प्रत्येक ट्रेड में करीब 60 सीटें निर्धारित कर हर साल करीब 240 छात्रों के नामांकन की योजना थी. कॉलेज शुरू होने से पलामू के अलावा गढ़वा, लातेहार व आसपास के जिलों के युवाओं को भी तकनीकी शिक्षा का लाभ मिल सकता था.

 

शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अटकी

 

कॉलेज शुरू नहीं होने के पीछे सबसे बड़ा कारण शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होना बताया जा रहा है. इसके अलावा प्रयोगशालाओं के लिए जरूरी मशीनें, उपकरण और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की व्यवस्था भी पूरी नहीं हो सकी है. प्रशासनिक स्तर पर कई बार कॉलेज को शुरू करने की चर्चा हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है.

 

बाहर पढ़ाई करने को मजबूर हैं जिले के छात्र

 

पलामू में पॉलिटेक्निक कॉलेज चालू नहीं होने से यहां के छात्रों को तकनीकी शिक्षा के लिए रांची, बोकारो, धनबाद व अन्य शहरों के संस्थानों में जाना पड़ता है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बाहर जाकर पढ़ाई करना काफी कठिन होता है. कई छात्र संसाधनों की कमी के कारण तकनीकी शिक्षा से वंचित भी रह जाते हैं.


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