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लातेहार: पंचायत समिति सदस्यों ने किया बैठक का बहिष्कार

 
Ashish Tagore Latehar: सरकारी पदाधिकारियों के द्वारा त्रि-स्तरीय पंचायत के जन प्रतिनिधियों को तरजीह नहीं देने या उनके द्वारा आहुत बैठकों में भाग नहीं लेने की शिकायत अक्सर देखने सुनने को मिलती है. पंचायतों के जन प्रतिनिधियों का अक्सर आरोप रहता है कि उन्हें सरकारी पदाधिकारियों के द्वारा तरजीह नहीं दी जाती है. यहां तक कि उनके पंचायत में संचालित होने वाली योजनाओं की जानकारी तक उन्हें नहीं दी जाती है. यही कारण है कि सरकारी अधिकारी व पंचायत के जन प्रतिनिधियो के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है. पंचायत प्रतिनिधियों का अक्सर आरोप रहता है कि उन्हें वह हक व अधिकार नहीं दिया गया है, जिसका वे हकदार हैं. ऐसा ही मामला यहां मंगलवार को सामने आया है. दरअसल मंगलवार को सदर प्रखंड के पंचायत समिति सदस्यों की मासिक बैठक थी. लेकिन बैठक में सिर्फ बीडीओ व अन्य चार विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था. जबकि 29 विभागों को बैठक में भाग लेने की लिए सूचना दी गयी थी. जब काफी देर तक अन्य विभागों के पदाधिकारी या उनके प्रतिनिधि नहीं पहुंचते तो प्रखंड प्रमुख व उप प्रमुख समेत पंचायत समिति सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया. आक्रोशित पंचायत समिति सदस्य बुधवार को उपायुक्त से इसकी शिकायत कर कार्रवाई की मांग करेंगे. मौके पर प्रखंड प्रमुख परशुराम लोहरा, उप प्रमुख राजकुमार प्रसाद, पंसस सरिता देवी, पुनीत भुईयां, सीता कुमारी, शांति देवी, पिंकी देवी, अनीता देवी, रीना देवी, कौशल अली समेत प्रखंड के सभी पंचायत समिति सदस्य मौजूद थे.

चार माह से बैठक नहीं हुई है: प्रमुख

प्रखंड प्रमुख परशुराम लोहरा ने कहा कि पिछले चार माह से पंचायत समिति की सदस्यों की बैठक नहीं हुई है. जबकि बैठक हर माह होनी है. पिछले जनवरी माह के बाद अब जून मे बैठक की जा रही है.बावजूद इसके बैठक में पदाधिकारी भाग नही ले रहे हैं. इस कारण पंचायतों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है.बैठक में भाग लेने के लिए 29 विभागों को पत्र भेजा गया था. लेकिन 24 विभागों के न तो पदाधिकारी पहुंचे और ना ही उनके कोई प्रतिनिधि.

पिछली बैठक में भी नहीं पहुंचे थे पदाधिकारी: उप प्रमुख

उप प्रमुख राजकुमार प्रसाद ने कहा कि यह ऐसा नहीं है कि पहली बार पदाधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे हैं. इससे पहले भी जब जनवरी में बैठक हुई थी, उसमें भी कई पदाधिकारी व कर्मी अनुपस्थित थे. उन्हें इसे ले कर स्पष्टीकरण भी जारी किया गया था, लेकिन आज तक उन्होंने स्पष्टीकरण का कोई जवाब नहीं दिया गया. सरकारी पदाधिकारी हमेशा जन प्रतिनिधियो को नीचा दिखाना चाहते हैं. उनके मनमाने रवैये के कारण पंचायतों का काम बाधित हो रहा है. इसे भी पढ़ें - POTA">https://lagatar.in/mcc-commander-tilak-sahu-found-guilty-in-pota-then-dgp-mv-rao-also-testified/">POTA

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