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पंचायत चुनाव तय करेगा मांडर उपचुनाव का भविष्य !

Ranchi: झारखंड में होने वाला पंचायत चुनाव 2024 में राजनीतिक दलों का भविष्य तय करेगा, लेकिन उससे पहले मांडर उपचुनाव के नतीजे को यह चुनाव प्रभावित करेगा. यही वजह है कि राजनीतिक दलों ने अभी से मांडर में घेराबंदी शुरू कर दी है. मांडर प्रखंड के 19 पंचायतों के साथ इटकी, लापुंग और बेड़ो के भी कई पंचायत मांडर विधानसभा में आते हैं. मांडर उपचुनाव में उस दल को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जिन्हें वहां के पंचायतों के चुने हुए नए जनप्रतनिधियों का साथ मिलेगा. यही वजह है कि पार्टियां मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के पद के मजबूत दावेदारों को अपने खेमे में करने की जुगत में लगे हैं. मांडर विधानसभा एसटी रिजर्व सीट है. बंधु तिर्की पिछले विधानसभा चुनाव में जेवीएम के टिकट पर यहां से चुनाव जीते थे. चुनाव के बाद वे कांग्रेस में चले गये. जाहिर है उपचुनाव में यूपीए गठबंधन के तहत यहां से कांग्रेस ही उम्मीदवार उतारेगा, लेकिन मांडर विधानसभा क्षेत्र में हुए चुनावों के इतिहास को देखें तो कांग्रेस कभी भी इस सीट से जीत दर्ज नहीं कर पाई है. इसे भी पढ़ें-अध्ययन">https://lagatar.in/revealed-in-the-study-like-corona-there-are-more-than-5500-new-species-of-virus-in-the-seas-around-the-world/">अध्ययन

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2005 और 2009 में यहां कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी, लेकिन 2014 में खिसककर तीसरे और 2019 में पांचवें नंबर पर पहुंच गयी. मांडर में खत्म होते जनाधार को फिर से पाने के लिए कांग्रेस को इस पंचायत चुनाव में खूब पसीना बहाना होगा. उपचुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को सबसे पहले पंचायतों के प्रतिनिधियों के दिल को जीतना होगा. मांडर उपचुनाव में बीजेपी की राह इस बार उतनी कठिन नहीं दिख रही है, क्योंकि 2019 में यह सीट जेवीएम के पास था और अब जेवीएम बीजेपी में मिल चुका है. जबकि दूसरे नंबर पर बीजेपी थी. जेवीएम से खड़े बंधु को 92491 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी से खड़े देवकुमार धान को 69364 वोट मिले थे. वहीं इससे पहले जब 2014 में बंधु ने टीएमसी से चुनाव लड़ा था तब उन्हें सिर्फ 46595 वोट मिले थे. इसे भी पढ़ें-सीएम">https://lagatar.in/jharkhand-news-khunti-district-administration-will-provide-government-accommodation-to-constable-mukti-purti-on-the-instructions-of-cm-hemant-soren/">सीएम

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यानी 2019 में बंधु को जितने वोट मिले उनमें से आधा जेवीएम यानी बाबूलाल मरांडी के नाम पर मिला वोट माना जा सकता है. अब देवकुमार धान को मिले वोट और बंधु तिर्की को मिले आधे वोट को जोड़ दें तो वोटों की संख्या 1 लाख से ज्यादा पहुंच जाती है. इस लिहाज से मांडर में बीजेपी की स्थिति बेहतर दिख रही है, फिर भी बीजेपी मांडर में मेहनत कर रही है. अब पंचायतों में भी पार्टी ने दस्तक देना शुरू कर दिया है. देखना ये है कि पंचायत चुनाव मांडर उपचुनाव का क्या भविष्य तय करता है. [wpse_comments_template]  

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