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पप्पू यादव का चुनावी व्यवस्था पर हमला, बोले- 100-200 करोड़ नहीं तो MP-MLA बनना मुश्किल

Dhanbad News: पप्पू यादव ने बिहार की विधान परिषद चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह जिस दिन सत्ता में आएंगे बिहार में एमएलसी की व्यवस्था खत्म कर देंगे. उन्होंने कहा कि राज्य में केवल राज्यसभा की व्यवस्था पर्याप्त है.
 
पत्रकारों से बात करते पप्पू यादव

Dhanbad News: बारामुड़ी खटाल के लोगों के समर्थन में धनबाद पहुंचे पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार की चुनावी व्यवस्था और राजनीति पर बेहद तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनाव में जनसेवा और जनसमर्थन से ज्यादा धनबल और बाहुबल का प्रभाव है. महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह जैसे आदर्श व्यक्तित्व राजनीति में पैदा होने के बजाय अपराधियों, माफियाओं और पैसे वालों का दबदबा बढ़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि जिसके पास 100, 200 या 300 करोड़ रुपये नहीं हैं उसके लिए विधायक या सांसद बनना बेहद मुश्किल हो गया है.

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पप्पू यादव ने बिहार की विधान परिषद चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह जिस दिन सत्ता में आएंगे बिहार में एमएलसी की व्यवस्था खत्म कर देंगे. उन्होंने कहा कि राज्य में केवल राज्यसभा की व्यवस्था पर्याप्त है. गरीबों का पैसा एमएलसी व्यवस्था पर क्यों खर्च किया जाए. उनके अनुसार इस व्यवस्था के जरिए माफिया और पैसे वाले लोग सदन तक पहुंच रहे हैं.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि एमएलसी चुनाव में उम्मीदवारों को टिकट देने से लेकर जीत हासिल करने तक धनबल का खेल चलता है. उन्होंने एक उम्मीदवार पर कॉलेज की सहपाठी के साथ आपत्तिजनक चैट में पकड़े जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके बावजूद ऐसे लोगों को टिकट दिया जाता है.

 

सांसद ने चुनाव में वोटों की कथित खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में मुखिया से लेकर विधायक और सांसद तक के चुनाव में पैसे का प्रभाव बढ़ गया है. उन्होंने दावा किया कि 10 हजार रुपये से लेकर 40 करोड़ रुपये तक में वोटों का सौदा होने की बातें सामने आती हैं. उन्होंने कहा कि बिना पैसे के चुनाव जीतना मुश्किल होता जा रहा है.

 

पप्पू यादव ने उच्च शिक्षा से लेकर राजनीतिक प्रतिनिधियों तक में कथित खरीद-फरोख्त पर नाराजगी जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों और यहां तक कि राज्यसभा सदस्यों की निष्ठा भी पैसे के आधार पर प्रभावित हो रही है.उन्होंने हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में दलों के भीतर टूट और पाला बदलने को भी इसी कथित धनबल से जोड़कर सवाल उठाए.

 

पप्पू यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज बनने के लिए चुने जाने चाहिए लेकिन मौजूदा व्यवस्था में पैसे और प्रभावशाली लोगों का दबदबा बढ़ता जा रहा है. उन्होंने चुनाव प्रणाली में सुधार और राजनीति को अपराध तथा धनबल से मुक्त करने की जरूरत बताई.

 

पप्पू यादव ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथित विवादित टिप्पणी पर नाराजगी जताई. उन्होंने उन्हें भाजपा का एजेंट करार देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस ऐसे बाबाओं को बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और भारतीय संस्कृति के नाम पर किसी को भी मनमानी करने की छूट नहीं दी जा सकती.

 

पप्पू यादव ने दावा किया कि उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने कहा कि धार्मिक कथावाचकों और बाबाओं के लिए सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए. उनके लिए निश्चित मानदंड और आचार संहिता तय होनी चाहिए ताकि धर्म के नाम पर विवादित बयान देकर लोगों की भावनाओं को आहत करने की घटनाओं पर रोक लग सके.

 

बिहार की राजनीति पर बोलते हुए सांसद ने अनंत सिंह को माफिया बताया. उन्होंने बिहार में हाल ही में हुए एमएलसी चुनाव में धनबल के इस्तेमाल का आरोप लगाया. कहा कि बिहार में एमएलसी चुनाव की व्यवस्था ही समाप्त कराई जानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में एमएलसी से लेकर सांसद और विधायक के चुनाव तक में धनबल और बाहुबल का प्रभाव देखने को मिलता है.

 

SIR पर भाजपा को घेरा

SIR के तहत घुसपैठियों को हटाने के भाजपा के दावे पर भी पप्पू यादव ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों से केंद्र में भाजपा की सरकार है. यदि घुसपैठिए देश में हैं तो इतने वर्षों में उन्हें हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई. उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और दिल्ली में CJP आंदोलन तथा कांग्रेस की रैली सहित कई अन्य मुद्दों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की.

 

MMDR विधेयक को बताया उद्योगपतियों के हित में

केंद्र सरकार के MMDR विधेयक पर पप्पू यादव ने कहा कि इससे झारखंड के विकास और राज्य सरकार की योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. उनके अनुसार यह विधेयक उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाला है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर राज्य के हितों को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर केंद्र की ऐसी योजनाओं को राज्य में बंद करने का फैसला लें जो झारखंड के विकास में बाधक बन रही हैं. 

 

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