Ranchi : रांची में कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी खबर है. पारस एचईसी हॉस्पिटल ने स्कैल्प कूलिंग थेरेपी की शुरुआत की है, जिससे कीमोथेरेपी के दौरान होने वाले बाल झड़ने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा. यह अत्याधुनिक मशीन बिहार और झारखंड में पहली बार किसी अस्पताल में स्थापित की गई है.
हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ. गुंजेश कुमार ने बताया कि यह मशीन वेसोकॉन्स्ट्रिक्शन तकनीक पर आधारित है. इसमें एक विशेष कैप का उपयोग किया जाता है, जिसमें कूलेंट के जरिए लगातार ठंडक पहुंचाई जाती है.
मशीन का तापमान लगभग शून्य डिग्री सेल्सियस तक रहता है, जबकि कैप का तापमान 17 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच नियंत्रित किया जाता है. इस प्रक्रिया से सिर की रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिससे कीमोथेरेपी की दवाओं का असर बालों की जड़ों तक कम पहुंचता है.
डॉ. गुंजेश कुमार ने बताया कि इस तकनीक से करीब 50 प्रतिशत से अधिक मरीजों में बाल झड़ने की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कैंसर उपचार के दौरान बालों का झड़ना विशेष रूप से महिलाओं के लिए मानसिक रूप से काफी पीड़ादायक होता है. स्कैल्प कूलिंग थेरेपी न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी मरीजों को मजबूत बनाती है और उनके आत्मविश्वास को बनाए रखने में मदद करती है.
पारस एचईसी हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने बताया कि अस्पताल लगातार मरीजों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है. स्कैल्प कूलिंग थेरेपी मशीन की शुरुआत इसी प्रयास का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि यह तकनीक कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है और इससे इलाज के दौरान उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा.
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