Patna: पटना के NEET छात्रा मौत मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है. इस मामले में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है. बता दें, राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा केंद्र सरकार से की थी. जिसके बाद केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते सीबीआई को जरूरी दिशा-निर्देश दिये थे. अगले एक-दो दिन में सीबीआई पुलिस द्वारा इस मामले में अब तक की गई जांच से जुड़े दस्तावेज और सबूत ले लेगी.
उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार ने NEET छात्रा की मौत मामले में सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी. साथ ही दिल्ली पुलिस स्टैबलिशमेंट एक्ट की धारा छह के तहत सीबीआई को राज्य में जांच करने के लिए अधिकृत कर दिया था. राज्य सरकार की अनुशंसा के बाद केंद्र सरकार में दिल्ली पुलिस स्टैबलिशमेंट एक्ट की धारा पांच के तहत अधिसूचना जारी की. केंद्र सरकार दिल्ली पुलिस स्टैबलिशमेंट एक्ट की धारा पांच के तहत अधिसूचना जारी कर सीबीआई की शक्तियों को राज्य तक बढ़ा दिया जाता है.
राज्य सरकार द्वारा NEET छात्रा मौत मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा के बाद से ही पटना सीबीआई ने अपनी आंतरिक तैयारियां शुरू कर दी थी. इस प्रक्रिया के दौरान सीबीआई ने अपने स्रोतों से भी घटना के सिलसिले में जानकारी जुटायी है.
गौरतलब है कि जहानाबाद निवासी छात्रा पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभु गर्ल्स हॉस्टल में रह कर NEET की तैयारी कर रही थी. छात्रा को उसके कमरे में बेहोश पाये जाने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया था. इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गयी थी.
पुलिस की ओर से शुरू में इसे आत्महत्या का मामला बताने की कोशिश की गयी. लेकिन पोस्टमार्टम में छात्रा के शरीर पर संघर्ष और दुष्कर्म से संबंधित निशान पाये जाने के बाद विवाद गहरा गया. पुलिस ने मामले की जांच के दौरान हॉस्टल संचालक कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी.
हालांकि छात्रा के पारिवारिक सदस्यों को अब तक की घटनाओं के मद्देनजर सिर्फ सीबीआई जांच पर भरोसा नहीं है. छात्रा के पारिवार मामले की जांच न्यायालय की निगरानी में कराने के पक्ष में हैं. छात्रा के पिता की ओर से न्यायिक जांच की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गयी थी. इसमें हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच कराने की मांग की गयी थी.
याचिका में पुलिस और SIT पर अपराधियों को पकड़ने के बदले छात्रा के घर वालों को ही परेशान करने का आरोप लगाया गया था. न्यायाधीश अरुण कुमार झा की पीठ में इस याचिका की सुनवाई हुई थी. न्यायालय ने मामले में न्यायिक जांच की मांग को अस्वीकार कर दिया है. न्यायालय ने कहा कि सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की है. ऐसी स्थिति में फिलहाल मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.
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