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पटना HC की अहम टिप्पणी, सहमति से बने संबंध बलात्कार नहीं, शादी न होने से नहीं बनता अपराध

दो बालिग व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से बना शारीरिक संबंध बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता. ये अहम टिप्पणी  पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में सुनवाई के दौरान की है.
 

Lagatar Desk :  दो बालिग व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से बना शारीरिक संबंध बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता. ये अहम टिप्पणी  पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में सुनवाई के दौरान की है.

 

न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव की एकलपीठ ने  अभियुक्त मोहम्मद सैफ अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर किसी पर दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया जा सकता कि बाद में शादी नहीं हो सकी.

 

अदालत ने भागलपुर के अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया. साथ ही अभियुक्त के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दर्ज मामले को तथ्यहीन मानते हुए निरस्त कर दिया. 

 

 

सहमति से बने रिश्ते के टूट जाने पर वह अपराध नहीं माना जाएगा

दरअसल मोहम्मद सैफ अंसारी पर आरोप लगाया गया था कि उसने शादी का झांसा देकर करीब एक साल तक पीड़िता से शारीरिक संबंध बनाए. वहीं, आरोपी की दलील थी कि दोनों वयस्क थे और संबंध आपसी सहमति से बने थे. 

 

हाईकोर्ट ने कहा कि झूठा वादा करना और परिस्थितियों के कारण विवाह का न होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. यदि शुरू से ही सहमति थी, तो बाद में विवाह न होने से यह दुष्कर्म नहीं कहा जाएगा. अदालत ने यह भी कहा कि सहमति से बने रिश्ते के टूट जाने पर उसे आपराधिक मामला बनाना कानून की मंशा के खिलाफ है.

 

मुकदमों में केवल औपचारिकता न निभाएं

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालतों को यह भी निर्देश दिया कि वे मुकदमों में केवल औपचारिकता न निभाएं, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों की गहराई से जांच करें. पर्याप्त सबूत न होने की स्थिति में आरोपी को अनावश्यक रूप से मुकदमे में घसीटना उचित नहीं है.

 

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