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Patna : राजभवन घेरने जा रहे छात्रों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े, वाटर कैनन चलाया

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अगुवाई में राजभवन घेराव करने निकले छात्र, शोधार्थी, शिक्षक और कर्मचारियों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया है. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई.
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Lagatar Desk :  ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अगुवाई में राजभवन घेराव करने निकले छात्र, शोधार्थी, शिक्षक और कर्मचारियों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया है. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई. 

 

हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया. साथ ही आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया है. 

 

 

बता दें कि छात्र, शोधार्थी, शिक्षक और कर्मचारी पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को खत्म करने के खिलाफ गांधी मैदान में जुटे. इसके बाद पैदल मार्च कर राजभवन घेराव करने निकले थे, जिन्हें पुलिस ने रोक लिया.

 

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों पर की गई पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया और शिक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा. इस दौरान छात्रों वे NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. 

 

आइसा का कहना है कि पेपर लीक और शिक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर कार्रवाई करने के बजाय उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए. संगठन का यह भी आरोप है कि पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में बदलाव या उसे खत्म करने से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता प्रभावित होगी.

 

आइसा की पटना विश्वविद्यालय इकाई की सचिव सबा आफरीन ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को खत्म करने की कोशिश विश्वविद्यालय की स्वतंत्र पहचान पर असर डालेगी.  उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई और डिग्री देने का स्थान नहीं है, बल्कि यह विचारों के आदान-प्रदान, बहस और लोकतांत्रिक माहौल को बढ़ावा देने का भी केंद्र है. 

 

इससे एक दिन पहले, मंगलवार को पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ, कर्मचारी संघ और कॉलेज कर्मचारी संघ ने विश्वविद्यालय परिसर में संयुक्त धरना दिया था. इस धरने में आइसा के कार्यकर्ता भी शामिल हुए थे. प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, छात्रों के अधिकार और शिक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई.

 

 

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