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पेसा नियमावली से गांवों को मिला अधिकारों, भाजपा की राजनीति बेनकाब: सुप्रियो भट्टाचार्य

Ranchi: झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि पेसा नियमावली को लागू कर हेमंत सोरेन सरकार ने आदिवासी और ग्रामीण समाज को शोषण से मुक्त करने की ठोस पहल की है. उन्होंने दावा किया कि इस कदम से वर्षों से चले आ रहे वनोपज, बालू और गिट्टी के अवैध कारोबार की जड़ें कमजोर होंगी और उन्हीं ताकतों का राजनीतिक संरक्षण भी समाप्त होगा, जिनका प्रतिनिधित्व भाजपा करती रही है.

 

पार्टी मुख्यालय में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि नियमावली बनने के बाद अब गांवों की ग्राम सभाएं अपनी नीतियां स्वयं तय करेंगी. किसी भी तरह का दबाव बनाकर खनन लीज लेना संभव नहीं होगा. 

जंगलों की अंधाधुंध कटाई और केंदू पत्ता सहित अन्य वनोपज की लूट पर प्रभावी रोक लगेगी. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया शोषण मुक्त गांवों की दिशा में निर्णायक कदम है.

 

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो नेता आज पेसा पर सवाल उठा रहे हैं, वे केंद्र में जनजातीय मामलों के मंत्री और राज्य में कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. अपने लंबे कार्यकाल में पेसा के क्रियान्वयन के लिए ठोस काम करने के बजाय उन्होंने केवल अपनी जाति पातर मुंडा को एसटी सूची में शामिल कराने पर जोर दिया. 


उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियमावली गलत है तो मांझी, मानकी, मुंडा, डोकलो और सोहोर जैसे पारंपरिक ग्राम प्रधान खुलकर इसके विरोध में क्यों नहीं आ रहे हैं. केवल भाजपा को ही असहजता क्यों हो रही है.

 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र में पूर्व की सरकारों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कभी टीएसी का अध्यक्ष गैर आदिवासी रहा. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के शासनकाल में डोमिसाइल नीति को लेकर व्यापक विवाद हुआ और तपकरा जैसी घटनाओं में आदिवासियों पर गोलियां चलीं. उन्होंने कहा कि भाजपा को झारखंड पर सवाल उठाने से पहले छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे भाजपा शासित राज्यों में पेसा से जुड़े प्रावधानों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

 

उन्होंने यह भी कहा कि पेसा नियमावली से पारंपरिक शोषण की व्यवस्थाएं खत्म होंगी, जहां 10 किलो महुआ के बदले केवल एक किलो सरसो तेल या पांच केजी महुआ के बदले एक किलो चीनी देकर ग्रामीणों को ठगा जाता था. अब ऐसे सौदों की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी.

 

अखिल भारतीय सेवा की अधिकारी निशा उरांव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह मामला ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट से जुड़ा है और प्रशासन को इस पर गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए.

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