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OMR आंसर सीट मार्किंग त्रुटि मामले में प्रार्थी को हाईकोर्ट से राहत नहीं, याचिका खारिज

Ranchi : जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2025 के प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने प्रार्थी को किसी तरह की राहत नहीं देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी.
 
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Ranchi : जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2025 के  (विज्ञापन संख्या 1/2026) की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने प्रार्थी को किसी तरह की राहत नहीं देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी. 

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सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल एवं अधिवक्ता जयप्रकाश की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि OMR उत्तर पुस्तिका में मार्किंग (बबलिंग) में त्रुटि के मामले में झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ एवं सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश पारित किया है. जिसमें कहा गया है कि OMR उत्तर पुस्तिका में मार्किंग में गलती के कारण किसी अभ्यर्थी का OMR शीट रिजेक्ट हो जाएगा.

 

ऐसे में आयोग ने अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी नहीं कर किसी प्रकार की कोई गलती नहीं की है. प्रार्थी के स्वयं की गलती कारण उनका OMR शीट रिजेक्ट हुआ है. यहां बता दें कि इससे पहले मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट में हुई थी. इस मामले में सुनवाई के बाद एकल पीठ ने मामले को हाईकोर्ट की खंडपीठ के पास भेज दिया था.

 

एकल पीठ में सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया था कि जेपीएससी ने उक्त परीक्षा का रिजल्ट 2 जुलाई 2026 को जारी किया था. उसमें जेपीएससी ने उन छात्रों को सफल घोषित नहीं किया है जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पत्र 1 में गलत ढंग से OMR शीट में मार्किंग (बबलिंग) की थी या एक ही खाने में दो जगह मार्किंग कर दी थी.

 

राजन कुमार सिंह की OMR शीट में प्रश्न पत्र 1 त्रुटि थी इसलिए जेपीएससी ने उन्हें रिजेक्ट किया था. जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. OMR शीट में त्रुटि रहने पर हाईकोर्ट की खंडपीठ और सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि जेपीएससी ऐसे अभ्यर्थियों की OMR  शीट रिजेक्ट कर सकती है. इसके बाद एकल पीठ ने 8 जुलाई को यह मामला सुनवाई के लिए हाईकोर्ट की खंडपीठ को भेज दिया था.

 

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