- 500 एकड़ जमीन पर अवैध निर्माण का आरोप
- 271 अतिक्रमण और 1292 आवास से जुड़े मामले लंबित
- बेदखली के आदेश लागू कराने में पुलिस की मदद जरूरी
- प्रभावित लोगों को पक्षकार बनाए बिना सामान्य आदेश देना उचित नहीं
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) टाउनशिप और बोकारो शहर के विभिन्न इलाकों में सेल (SAIL) तथा सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग वाली जनहित याचिका निष्पादित कर दी.
इसे भी पढ़ें:
हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि संबंधित अधिकारी अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं. कई मामलों में बेदखली के आदेश भी पारित किए गए हैं. इसलिए इसे अधिकारियों की पूरी निष्क्रियता का मामला नहीं माना जा सकता.
खंडपीठ ने अधिवक्ता भगवान प्रसाद साहू की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने कहा कि जनहित याचिका का उद्देश्य अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए सक्रिय करना है.
वर्तमान मामले में अधिकारियों ने अतिक्रमण और आवंटित आवासों में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने की स्थिति से इनकार नहीं किया है, बल्कि कार्रवाई शुरू करने और उसे जारी रखने की बात कही है. इन परिस्थितियों में अदालत ने किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं समझी.
याचिकाकर्ता ने अदालत से बोकारो स्टील प्लांट टाउनशिप और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सेल तथा सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का निर्देश देने की मांग की थी.
याचिका में बीएसएल के राज्य अधिकारी की ओर से केस संख्या ए/ई/51/2012 में पारित आदेश का अनुपालन कराने का भी आग्रह किया गया था. उक्त आदेश के तहत सेल की करीब 500 एकड़ जमीन पर बने लगभग 4,000 कच्चे-पक्के मकानों और खटालों से अनधिकृत निर्माण हटाने की कार्रवाई की मांग की गई थी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, अतिक्रमणकारियों के खिलाफ करीब 271 मामले लंबित हैं. इसके अलावा, बीएसएल के आवंटित आवासों में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने वाले लोगों के खिलाफ लगभग 1,292 कार्यवाही लंबित हैं.
याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि बीएसएल प्रबंधन और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के कारण अतिक्रमण हटाने और आवास खाली कराने की कार्रवाई प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है.
बीएसएल की ओर से अदालत को बताया गया कि अतिक्रमण और आवास खाली कराने के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है. कई मामलों में बेदखली के आदेश पारित हो चुके हैं, लेकिन उन्हें लागू कराने के लिए राज्य प्रशासन और पुलिस का सहयोग आवश्यक है. प्रबंधन संबंधित अधिकारियों के साथ इस दिशा में प्रयास कर रहा है.
खंडपीठ ने कहा कि याचिका में पर्याप्त और विस्तृत तथ्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. इसके अलावा, जिन लोगों को अतिक्रमणकारी बताया गया है या जो बीएसएल के आवंटित आवासों में निर्धारित अवधि से अधिक समय से रह रहे हैं, उन्हें याचिका में पक्षकार भी नहीं बनाया गया है. ऐसे में उनके हितों को प्रभावित करने वाले व्यापक निर्देश जारी करना उचित नहीं होगा.
अदालत ने स्पष्ट किया कि बीएसएल को बेदखली के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए और राज्य प्रशासन से भी उन्हें लागू कराने में सहयोग की अपेक्षा है. हालांकि, यह कार्रवाई सक्षम अदालत या अपीलीय प्राधिकरण की ओर से संबंधित व्यक्तियों को दिए गए किसी अंतरिम या अंतिम आदेश के अधीन रहेगी.
खंडपीठ ने पूर्व में पारित आदेशों की अवहेलना किए जाने की दलील भी स्वीकार नहीं की. अदालत ने कहा कि संबंधित आदेश करीब 10 से 15 वर्ष पहले पारित हुए थे और उनके अनुपालन नहीं होने की शिकायत लेकर किसी ने भी अब तक कार्यवाही शुरू नहीं की थी.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

