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पीएम मोदी ने की परीक्षा पे चर्चा, छात्रों को दी सलाह, लिखकर अभ्यास करें, सीखने की जिज्ञासा बनाये रखें

पीएम ने कहा कि पेपर सॉल्व करने की नियमित आदत डालेंगे, तो परीक्षा का डर धीरे-धीरे खत्म हो जायेगा. कहा कि लगातार अभ्यास करने से आत्मविश्वास बढ़ता है. इससे छात्रों को परीक्षा बोझ नहीं लगेगी, पीएम मोदी ने छात्रों से आग्रह किया कि वे पढ़ाई में कमजोर सहपाठियों की मदद करें,
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NewDelhi : प्रधानमंत्री मोदी ने आज सोमवार को छात्रों के साथ परीक्षा पे चर्चा की. उन्होंने देशभर से आये छात्रों से संवाद किया. यह 9वें संस्करण का दूसरा एपिसोड था. पीएम मोदी ने बच्चों से पढ़ाई, परीक्षा का टेन्शन, टेक्नोलॉजी, लीडरशिप और जीवन कौशल सहित अन्य विषयों पर मंथन किया.

 

 

 
पीएम ने छात्रों को सलाह दी कि वे हमेंशा सीखने की जिज्ञासा बनाये रखें. निडर बनें. पीएम ने कहा, टेक्नोलॉजी से डरने या उसके पीछे भागने की जरूरत नहीं है. छात्रों से कहा कि कभी भी टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं बनना चाहिए.


पीएम मोदी ने तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, असम के  छात्रों से सीधी बातचीत की. यह एक मल्टी-लोकेशन फॉर्मेट था.   


अहम बात यह रही कि परीक्षा की तैयारी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को साफ संदेश दिया कि महज किताबें पढ़ना ही सफलता की गारंटी नहीं है. पीएम ने पढ़ाई के साथ-साथ लिखकर अभ्यास करने को बेहद जरूरी बताया.  


इस क्रम में पीएम ने कहा कि पेपर सॉल्व करने की नियमित आदत डालेंगे, तो परीक्षा का डर धीरे-धीरे खत्म हो जायेगा. कहा कि लगातार अभ्यास करने से आत्मविश्वास बढ़ता है. इससे छात्रों को परीक्षा बोझ नहीं लगेगी, 


पीएम मोदी ने छात्रों से आग्रह किया कि वे पढ़ाई में कमजोर सहपाठियों की मदद करें,  क्योंकि जब हम दूसरों को पढ़ाते हैं तो अपनी समझ भी और मजबूत होती है.  श्री मोदी ने छात्रों को परीक्षा के तनाव से उबरने का तरीका बताया.


उन्होंने कहा कि छात्र अपनी पुरानी परीक्षाओं को याद करें उस समय भी मन में तनाव था, लेकिन परीक्षा खत्म होते ही सब कुछ सामान्य हो गया था. पीएम मोदी ने समझाया कि तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन नियमित अभ्यास से यह डर धीरे-धीरे खत्म हो जाता है.  


इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि जब भी कहीं घूमने जायें,  तो हर जगह चीजों को एक छात्र की नजर से देखें, ताकि सीखने की प्रक्रिया कभी न रुके.


लीडरशिप के संदर्भ में पीएम मोदी ने कहा कि सबसे पहले निडर बनें. जब कोई व्यक्ति मन में यह ठान लेता है कि चाहे कोई और करे या न करे, मैं यह काम जरूर करूंगा,  तभी नेतृत्व की शुरुआत होती है. उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि अगर कोई सड़क पर पड़ा कचरा उठाता है, तो उसे देखकर लोग भी वैसा ही करने लगते हैं.  

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