New Delhi : IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में आज शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए. पीएम ने देश के युवाओं, (जो आज कल Gen-Z के नाम से पुकारे जाते हैं) के समक्ष आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की. पीएम ने समझाया कि दुनिया तेजी से बदल रही है.
VIDEO | Delhi: Attending the 57th convocation ceremony of IIT Delhi, PM Modi (@narendramodi) says, "You are leaving this place with dreams of doing a lot for the country. Today, several students have received medals for their achievements. I extend my heartfelt congratulations to… pic.twitter.com/KJ7H8oWUpm
— Press Trust of India (@PTI_News) August 8, 2026
छात्रों से कहा, आगामी 20-30 साल की दुनिया कैसी होगी, यह नहीं बताया जा सकता. बदलते समय में चुनौतियां तो आयेंगी, लेकिन नये अवसर भी पैदा होंगे. उन्होंने Gen-Z से कहा कि जो भी नयी चुनौतियों के नये समाधान खोजने का साहस रखेगा, उसके लिए यह अवसर होगा.
पीएम मोदी ने युवाओं को सलाह दी कि वे सिर्फ सवालों के जवाब खोजने तक सीमित न रहें, बल्कि उन सवालों को पहचानने की कोशिश करनी चाहिए,जिन्हें दुनिया ने सवाल मानना छोड़ दिया है.प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि वे कॉलेज में एडिमशन के दिन से आज के कॉन्वोकेशन तक का सफर याद करें.
पीएम मोदी ने कहा कि हर छात्र के मन में आज के बाद भविष्य की तस्वीर होगी. कोई पहली सैलरी के बारे में सोच रहा होगा, कोई नये शहर में जाकर नयी शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा, कोई स्टार्टअप का सपना देख रहा होगा तो कोई अगली प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटेगा. पीएम मोदी ने इसी मौके पर हल्के फुल्के अंदाज में कहा, मैं तो बाबा बागेश्वर नहीं हूं.’लेकिन छात्रों के मन की इस हलचल को समझने की कोशिश जरूर कर रहा हूं.
प्रधानमंत्री की इस बात से छात्रों के चेहरों पर मुस्कान दौड़ गयी. पीएम मोदी ने छात्रों की हौसला बढ़ाते हुए कहा, आईआईटी दिल्ली की डिग्री को महज इस बात का प्रमाण नहीं मानें कि उन्होंने परीक्षा पास कर ली या अच्छा CGPA हासिल किया, शानदार प्लेसमेंट पाया.
आईआईटी डिग्री यह बता रही है कि वे कठिन समस्याओं का समाधान करना जानते हैं. स्पष्ट रूप से कहा, आईआईटी तक पहुंचना आसान नहीं था यहां की पढ़ाई भी आसान नहीं थी. पीएम मोदी ने कैंपस और कैंपस के बाहर की जिंदगी का अंतर छात्रों को समझाया.
पीएम मोदी ने कहा कि आईआईटी की परीक्षा में तो सिलेबस तय होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में बहुत कुछ आउट ऑफ सिलेबस होता है. कोई तय सिलेबस नहीं होता. इसलिए छात्रों को परिस्थितियों के अनुसार खुद सीखने और फैसले लेने की आदत डालनी होगी. जिंदगी में अपनी लर्निंग इंस्टिंक्ट को कभी खत्म न होने दें.
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