स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने SIR पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि इसके माध्यम से मुस्लिम, आदिवासी और दलित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि बिहार हमारा है और भाजपा जानती है कि ये समुदाय उसका वोट बैंक नहीं हैं, इसलिए उन्हें सूची से हटाने की कोशिश हो रही है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने सदन में विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की भी बात कही.
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने भी SIR की आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को विपक्ष की बात सुननी चाहिए. उन्होंने राहुल गांधी का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी की बातें सच साबित हो रही हैं और केंद्र सरकार बार-बार यू-टर्न ले रही है. उन्होंने SIR को ‘वोट रोकने की कोशिश’ करार दिया और कहा कि इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा.
सरयू राय ने SIR का किया समर्थन
वहीं, जदयू विधायक सरयू राय ने SIR का विरोध बेमानी और बेतुका बताया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और उसे मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार है. उन्होंने सुझाव दिया कि राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंट नियुक्त कर प्रक्रिया पर नजर रखनी चाहिए और यदि कोई त्रुटि हो तो ड्राफ्ट के बाद सुधार का विकल्प भी खुला है.
सरयू राय ने विपक्ष के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि सभी दलों को चुनाव आयोग के इस प्रयास में सहयोग करना चाहिए, ताकि मतदाता सूची अधिक पारदर्शी और अद्यतन हो सके.
क्या है SIR (Special Intensive Revision)?
यह चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की विशेष गहन जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसमें गलत नामों को हटाया जाता है और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाता है. बिहार में इस प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे राजनीतिक तनाव गहराता जा रहा है.
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