Ranchi News : झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सियासत तेज हो गई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा और कथित कोचिंग माफिया पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया.
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झामुमो नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए जेपीएससी और सीजीएल समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था. पार्टी के मुताबिक, इसके बाद कुछ छात्रों की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई, जिस पर अदालत ने सरकार के फैसले पर रोक लगाते हुए 15 दिनों के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
झामुमो का कहना है कि मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है. ऐसे में सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा और कोचिंग माफिया छात्रों को आगे कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं. झामुमो नेताओं ने कहा कि इसी कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में पुतला दहन जैसे कार्यक्रम किए जा रहे हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेता और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही पर भी झामुमो ने निशाना साधा. पार्टी नेताओं ने उनके खिलाफ जांच का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 130 करोड़ रुपये के कथित दवा घोटाले को लेकर सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है.
झामुमो ने दावा किया कि जांच से बचने के लिए शाही भाजपा का राजनीतिक संरक्षण ले रहे हैं. पार्टी नेताओं ने उनके बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.
वहीं, भाजपा की ओर से जेपीएससी-जएसएससी मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर भी झामुमो ने सवाल उठाए. पार्टी ने पूछा कि पहले और दूसरे जेपीएससी मामले की सीबीआई जांच का अब तक क्या परिणाम सामने आया. झामुमो नेताओं ने कहा कि देशभर में सीबीआई के पास बड़ी संख्या में पुराने मामले लंबित हैं.
इसके विपरीत झामुमो ने राज्य की सीआईडी जांच को प्रभावी बताते हुए दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और दो दर्जन से अधिक लोगों को जेल भेजा जा चुका है.
झामुमो ने कहा कि सरकार छात्रों के हित में काम कर रही है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है. पार्टी नेताओं के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने छात्रों की मांगों से आगे बढ़कर फैसले लिए हैं, लेकिन अब मामला अदालत में है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना चाहिए. पार्टी ने छात्रों से अपील की कि वे राजनीतिक दलों के बहकावे में न आएं और अपने आंदोलन को किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा न बनने दें.
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