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उत्तर प्रदेश में भी Uniform Civil Code पर राजनीति गरम, शिवपाल यादव ने कहा, इसकी लड़ाई लड़ेंगे

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Lucknow : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नक्शेकदम पर चलते हुए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि अब वे समान नागरिक संहिता लागू करने की लड़ाई लड़ेंगे. डॉक्टर अंबेडकर जयंती और राहुल सांकृत्यायन की पुण्यतिथि पर शिवपाल यादव ने यह एलान किया. बता दें कि लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय पर पुण्यतिथि और जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत के क्रम में शिवपाल यादव ने यह बयान दिया. इसे भी पढ़ें  : पेट्रोलियम">https://lagatar.in/petroleum-minister-hardeep-singh-puri-said-the-state-should-reduce-vat-on-petrol-and-diesel/">पेट्रोलियम

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 पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता की थी वकालत

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में घोषणा की थी कि सरकार बनने पर हम समान नागरिक संहिता लागू करेंगे. उत्तराखंड के बाद उत्तर प्रदेश के नेता शिवपाल यादव ने भी समान नागरिक संहिता लागू किये जाने की लड़ाई करने की बात कही. शिवपाल के बयान के बाद उत्तर प्रदेश में भी इस कानून को लेकर चर्चाएं शुरू हो गयी. इसे भी पढ़ें  :  Twitter">https://lagatar.in/elon-musks-heart-came-on-twitter-offered-to-buy-the-company/">Twitter

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अनुच्छेद 44 राज्य को समान नागरिक संहिता बनाने का निर्देश देता है

संविधान के मसौदे में अनुच्छेद 35 को अंगीकृत संविधान के आर्टिकल 44 के रूप में शामिल कर दिया गया था.   उम्मीद की गयी है कि जब राष्ट्र एकमत हो जायेगा तो समान नागरिक संहिता अस्तित्व में आ जायेगी. अनुच्छेद 44 राज्य को उचित समय आने पर सभी धर्मों लिए समान नागरिक संहिता बनाने का निर्देश देता है अनुच्छेद 44 का उद्देश्य कमजोर वर्गों से भेदभाव की समस्या को खत्म करके देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक समूहों के बीच तालमेल बढ़ाना है. इसे भी पढ़ें  :पाकिस्तान">https://lagatar.in/pakistan-imran-said-nuclear-weapons-are-not-safe-under-shahbaz-sharif-government-pakistan-army-claims-rejected/">पाकिस्तान

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अदालतों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों के फैसले जल्द होंगे

अलग-अलग धर्मों के अलग कानून से न्यायपालिका पर बोझ पड़ता है. समान नागरिक संहिता लागू होने से इस परेशानी से निजात मिलेगी और अदालतों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों के फैसले जल्द होंगे. शादी, तलाक, गोद लेना और जायदाद के बंटवारे में सबके लिए एक जैसा कानून होगा फिर चाहे वो किसी भी धर्म का क्यों न हो. वर्तमान में हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ यानी निजी कानूनों के तहत करते हैं. समान नागरिक संहिता की अवधारणा है कि सभी के लिए कानून में एक समानता से राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी. देश में हर भारतीय पर एक समान कानून लागू होने से देश की राजनीति में भी सुधार की उम्मीद है. समान नागरिक कानून सभी नागरिकों पर लागू होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म में विश्वास रखते हों. [wpse_comments_template]

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