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रेमडेसिविर पर राजनीति : JMM ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान बाद इज्जत बचाने के लिए बीजेपी बना रही बातें

  • बांग्लादेश से रेमडेसिविर लेने के हेमंत सोरेन के पत्र पर बाबूलाल मरांडी ने दिया जवाब
  • इसपर सत्तारूढ़ जेएमएम ने बीजेपी नेता से पूछे 7 सवाल, दिया सुप्रीम कोर्ट का हवाला

Ranchi : बांग्लादेशी कंपनी से रेमेडिसिविर सप्लाई का मामला अब तूल पकड़ते जा रहा है. बांग्लादेश से रेमडेसिविर खरीदने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा को लिखे पत्र का कोई जवाब नहीं मिलने पर उठे राजनीति को लेकर सोमवार शाम बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर सवाल खड़ा किया. इसपर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने कहा है कि आज जब रेमडेसिविर मांगने की अनुमति नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुई है, तब इज्जत बचाने के लिए बीजेपी नेता यह बातें बना रहे हैं. बता दें कि बाबूलाल ने कहा था कि बांग्लादेश से रेमेडिसिवर खरीद की झारखंड सरकार को अनुमति दिलाने और तमाम शंका के समाधान के लिए उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ भारतीय ड्रग कंट्रोलर से बात की. दोनों ने बताया कि किसी भी बांग्लादेशी कंपनी ने दवा सप्लाई के लिए आवेदन नहीं किया है.

जानिए जेएमएम के सात सवाल क्या हैं

अब सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये का जिक्र करते हुए बीजेपी नेता से ही सात सवाल पूछे हैं. ये सवाल हैं -
• एक राज्य जहां से आपके 12 सांसद हैं, वहां के मुख्यमंत्री इस विपदा में आधिकारिक पत्र लिखते हैं. केंद्र सरकार को और वहां के मंत्री व अधिकारी उसका जवाब 14 दिन नहीं देते. आपको बताना उचित समझा गया, पर झारखंडियों की ओर से लिखे गए उस पत्र की क्या कोई क़ीमत नहीं?
• क्या यह नियम पत्र का जवाब में नहीं दिया जा सकता था? या आपके केंद्र के मंत्री व अधिकारी को विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को जवाब नहीं देने की हिदायत है? ऐसे एकजुट होकर हम इस विपदा से लड़ेंगे?
• दुनिया के कई देश आज भारत की मदद कर रहे हैं. क्या, भारत सरकार सभी देशों से दवाइयां भेजने से पहले आवेदन मगंवा रही है? अगर आवेदन ही चाहिए था तो यह बात 14 दिन में क्यूं नहीं बतायी गई?
• आज सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद आप सब अपनी इज़्ज़त बचाने के ख़ातिर बीजेपी यह बात बना रही है. अगर वह पहले दिन बतायी गयी होती तो अब तक यह सारी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया होता.
• जो भी ज़रूरत के दस्तावेज हों, उसको मांगना केंद्र सरकार का काम था. 14 दिन से वह मांगे नहीं गए. क्या यह मांगने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने आपको दे रखी है?
• क्या आपकी पहल के बिना केंद्र सरकार यह काम नहीं करेगी या करती? अगर ऐसा है तो इतने दिनों से बार-बार पूछा जा रहा था, आप कम से कम हमें बता देते.
• झारखंड में आपके क़ुतुबमीनार से लेकर हरिद्वार तक के किस्से बच्चा बच्चा जानता है. इसलिए झूठ और भ्रम की बातें आपको शोभा नहीं देती.

इस विपदा काल में आप 14 अप्रैल से अपने घर से जहां बाहर नहीं निकले हैं, वही हमारे गठबंधन का कोई जनप्रतिनिधि अपने घर नहीं बैठा है. इस विपदा में जहां सारे झारखंडी एक होकर कोरोना से लड़ रहे हैं, वहीं भाजपा के पत्रवीर नेतागण झारखंडियों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं. इस विपदा में भी नियम/क़ानून और लालफ़ीताशाही. झारखंड इन्हें कभी माफ नहीं करेगा.

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