- राज्य सरकार, BCCL और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अगले 15 दिनों के भीतर संयुक्त बैठक आयोजित करे
- धनबाद में वायु प्रदूषण कम करने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विचार करें
- सभी एजेंसियों को संयुक्त कार्ययोजना बनाने का निर्देश
- धनबाद के DC, SSP व DMO के अलावा धनबाद नगर आयुक्त , प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव व BCCL के CMD हुए उपस्थित
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि धनबाद में प्रदूषण का स्तर संविधान प्रदत्त “स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में जीवन के अधिकार” के लिए गंभीर खतरा बन चुका है. कोर्ट ने धनबाद प्रदूषण पर कहा कि सभी एजेंसियां एक-दूसरे पर दोषारोपण करने के बजाय समन्वय के साथ समाधान की दिशा में कार्य करें.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि अब समय आ गया है कि सभी एजेंसियां एक-दूसरे पर दोषारोपण करने के बजाय समन्वय के साथ समाधान की दिशा में कार्य करें. यह भी कहा कि अदालत तकनीकी मामलों में गहराई से हस्तक्षेप नहीं करना चाहता, लेकिन नागरिकों के जीवन और पर्यावरण की रक्षा के संवैधानिक दायित्व से पीछे भी नहीं हट सकता.
धनबाद में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समन्वित और ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने ग्रामीण एकता मंच की जनहित याचिका एवं BCCL की याचिका पर सुनवाई की.
मामले की सुनवाई के दौरान धनबाद के DC आदित्य रंजन, SSP प्रभात कुमार, जिला खनन पदाधिकारी (DMO) रितेश राज तिग्गा, धनबाद नगर आयुक्त आशीष गंगवार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी, BCCL के CMD मनोज कुमार अग्रवाल अदालत में उपस्थित हुए.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, BCCL और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अगले 15 दिनों के भीतर संयुक्त बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि इस बैठक में वायु प्रदूषण कम करने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों, कार्यान्वयन की समयसीमा, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तंत्र और डेटा साझा करने की व्यवस्था पर चर्चा की जाए.
कोर्ट ने विशेष रूप से वनीकरण और ग्रीन कवर बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि BCCL इस दिशा में सहयोग को तैयार है, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को भूमि उपलब्ध कराने, पौधों की आपूर्ति और तकनीकी सहयोग देना होगा. कोर्ट ने कहा कि खनन एवं पुनर्वास क्षेत्रों में संयुक्त पौधारोपण कार्यक्रम प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बताया गया कि अब धनबाद की स्थिति “Critically Polluted Area” से घटकर “Severely Polluted Area” हो गई है. हालांकि अदालत ने कहा कि यह स्थिति भी चिंता का विषय है और धनबाद जैसे औद्योगिक शहर को इस टैग के साथ नहीं छोड़ा जा सकता.
हाईकोर्ट ने उपायुक्त धनबाद, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और BCCL के अधिकृत प्रतिनिधि को 17 जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. इन रिपोर्टों में उठाए गए कदमों, सहमति बने उपायों और मतभेद वाले मुद्दों का भी उल्लेख करना होगा. मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल में होगी.
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