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प्रशांत किशोर की पार्टी सुप्रीम कोर्ट पहुंची, कहा, भ्रष्टाचार हुआ, दोबारा बिहार चुनाव कराने की मांग

पार्टी के अनुसार बिहार चुनाव अवैध तरीके से जीता गया है. जन सुराज ने कहा कि आचार संहिता लागू किये जाने के बाद भी राज्य में महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये देने का भ्रष्ट आचरण किया गया.
 

Patna/ New Delhi : बिहार चुनाव को रद्द करने और नये सिरे से चुनाव कराने मांग को लेकर जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. जन सुराज पार्टी चुनाव विश्लेषक रहे प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित की गयी है.


पार्टी के अनुसार बिहार चुनाव अवैध तरीके से जीता गया है. जन सुराज ने कहा कि आचार संहिता लागू किये जाने के बाद भी राज्य में महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये देने का भ्रष्ट आचरण किया गया.


यह संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन है. खबर है कि जन सुराज पार्टी की याचिका पर CJI सूर्यकांत और जस्टिस जायमॉल्या बागची की पीठ शुक्रवार को सुनवाई करेगी.


याचिका में आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नये लाभार्थियों को जोड़ना और उन्हें भुगतान किया गया, यह अवैध है.


जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दे. 


याचिका में 25 -35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे राशि का हस्तांतरण चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला करार दिया गया है. स्वयं सहायता समूह जीविका से जुड़ी लगभग 1.8 लाख महिला लाभार्थियों की मतदान केंद्रों पर तैनाती को भी अवैध और अनुचित कहा गया है.


याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गयी है कि वह एस सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) मामले में जारी निर्देशों के अनुरूप मुफ्त योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और कल्याणकारी योजनाओं पर व्यापक दिशानिर्देश बनाने के लिए निर्वाचन आयोग को निर्देश दें.


चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से कम से कम छह माह पूर्व तक ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन की न्यूनतम समयसीमा तय करने की भी मांग की गयी है. 

 

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