Ranchi News: झारखंड अपने वित्तीय ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहा है. राज्य के सरकारी खर्चों को पर्यावरण और जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए 'ग्रीन बजटिंग' का एक प्रस्ताव तैयार किया गया है. यह अहम रोडमैप अंतरराष्ट्रीय संस्था 'इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस' (IEEFA) ने राज्य सरकार की टास्क फोर्स के साथ मिलकर बनाया है, जिसपर अब सरकार गंभीरता से विचार कर रही है.
खर्चों पर रहेगी पैनी नजर
इस नई व्यवस्था के तहत सरकारी पैसे के इस्तेमाल को सिर्फ पर्यावरण के लिए अच्छा या बुरा बताने के बजाय पांच अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि सरकार को साफतौर पर पता चलेगा कि किस योजना और नीति का प्रकृति पर कैसा असर पड़ रहा है. इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले खर्चों पर रोक लगेगी.
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कोयला मजदूरों का रखा जाएगा खास खयाल
झारखंड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कोयले पर टिकी है. भविष्य में जब राज्य स्वच्छ ऊर्जा की ओर मुड़ेगा, तो कोयला खदानों पर निर्भर लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट आ सकता है. इसे रोकने के लिए एक विशेष ट्रैकिंग सिस्टम का सुझाव दिया गया है, ताकि इन प्रभावित लोगों के सुरक्षित भविष्य और विकास के लिए पैसा सही जगह पहुंच सके.
शुरुआत में सिर्फ चार विभागों पर होगा फोकस
चूंकि यह एक बहुत बड़ा बदलाव है, इसलिए रिपोर्ट में इसे अचानक लागू करने के बजाय धीरे-धीरे अपनाने की सलाह दी गई है. सरकार की मंजूरी मिलने के बाद, इसे सबसे पहले ऊर्जा, कृषि, ग्रामीण विकास और वन विभाग में एक छोटे प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा. इसके काम को देखने के लिए वित्त विभाग के अंतर्गत एक विशेष 'ग्रीन बजटिंग सेल' भी बनाई जाएगी.
राज्य के लिए खुलेंगे निवेश के नए रास्ते
यह पूरी तैयारी भविष्य के ऊर्जा बदलावों को ध्यान में रखकर की जा रही है. अगर राज्य सरकार इस प्रस्ताव को पूरी तरह लागू कर देती है, तो झारखंड भी बिहार, ओडिशा और असम जैसे राज्यों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा. यह कदम न केवल राज्य को जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचाएगा, बल्कि भविष्य में देश और दुनिया से नया निवेश लाने का भी एक बड़ा जरिया बनेगा.
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