Ranchi News : झारखंड में बालू का वैध-अवैध कारोबार सालों से सुर्खियों में रहा है. बालू माफियाओं का नेटवर्क लंबा-चौड़ा है. कथित तौर पर प्रशासनिक-राजनीतिक सांठगांठ से करोड़ों का इस गोरखधंधे में राजस्व का नुकसान तो होता ही रहा है, आम आदमी भी पिसता है. बालू के इस खेल में किसी जिले में डीएमओ सवालों के घेरे में हैं, तो किसी जिले के दूसरे अधिकारी. इस बीच रांची के सिल्ली-सोनाहातु से जुड़ी जो खबर सामने रही है, इसके संकेत यही हैं कि एनजीटी की रोक हटते ही कारोबारी सक्रिय हैं. जबकि सोनाहातू अंचल के तीन बालू घाट ऐसे हैं, जिससे बालू का खनन नहीं किया जा सकता. फॉरेस्ट क्लियरेंस नहीं मिलने की वजह से ऑक्शन ही नहीं हो सकता.
सिल्ली-सोनाहातू के तीन बालू घाट
- एडरमहातु
- सोमाडीह
- डिबाडीह
सूत्रों ने बताया है कि एनजीटी की रोक हटने के बाद इन तीनों बालू घाटों से बालू खनन की तैयारी की जा रही है. इसकी बड़ी वजह यह है कि सिल्ली-सोनाहातू इलाके में इसी तीन घाटों में बालू है. बाकी में बहुत कम बालू है. तीनों बालू घाट कांची नदी में है. वन विभाग के मुताबिक, ये तीनों बालू घाट जंगली हाथियों के आने-जाने का मुख्य रास्ता है और जल ग्रहण क्षेत्र भी है, इसलिए बालू खनन की स्वीकृति नहीं दी जा सकती.
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जानकारी के मुताबिक, साल 2015-16 से 2017-18 के लिए इन तीनों बालू घाटों का ऑक्शन किया गया था. राजस्थान के संदीप चांडक ने ऑक्शन हासिल किया था. उस वक्त वन विभाग ने आपत्ति की थी. वन विभाग की आपत्ति के बाद 24 जनवरी 2018 को रांची के उपायुक्त ने खनन विभाग को पत्र लिख कर स्पष्ट कर दिया था कि इन तीनों बालू घाटों से खनन नहीं हो सकता. इसलिए संदीप को ऑक्शन की राशि का 40 प्रतिशत वापस कर दी जाये. अब ताजा जानकारी यह मिल रही है कि इन तीन बालू घाटों से खनन करके दूसरे घाट के चालान के माध्यम से बाजार में बालू बेचा जायेगा.

