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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'जोहार' से की अपने पहले संबोधन की शुरुआत

राष्ट्रपति ने कहा कि जगन्नाथ क्षेत्र के एक प्रख्यात कवि भीम भोई की कविता की एक पंक्ति है: “मो जीवन पछे नर्के पड़ी थाउ, जगत उद्धार हेउ”. अर्थात, अपने जीवन के हित-अहित से बड़ा जगत कल्याण के लिए कार्य करना होता है. उन्होंने कहा कि जगत कल्याण की भावना के साथ, मैं आप सब के विश्वास पर खरा उतरने के लिए पूरी निष्ठा व लगन से काम करने के लिए सदैव तत्पर रहूंगी.
New Delhi : द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को देश की 15वीं राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली. इसके साथ ही उन्होंने शीर्ष पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी और दूसरी महिला होने का गौरव भी हासिल किया है. पहले संबोधन की शुरुआत `जोहार ! नमस्कार !` से की और गरीबी में हुई प्रारंभिक शिक्षा से लेकर राजनीति की शुरुआत और राष्ट्रपति बनने के सफर को याद किया. इस दौरान उन्होंने खासतौर से महिलाओं के सशक्तिकरण पर बात की और इस उपलब्धि को गरीबों को समर्पित किया. कहा, मेरे इस निर्वाचन में देश के गरीब का आशीर्वाद शामिल है. देश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के सपनों और सामर्थ्य की झलक है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/Untitled-3-copy-16.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> इसे भी पढ़ें – द्रौपदी">https://lagatar.in/draupadi-murmu-takes-oath-as-the-president-becomes-the-15th-president-of-the-country/">द्रौपदी

मुर्मू ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली,देश की 15 वीं राष्ट्रपति बनीं

नए पद की जिम्मेदारी के समय का खास जिक्र किया

राष्ट्रपति मुर्मू ने उनकी सियासी पारी और नए पद की जिम्मेदारी के समय का खास जिक्र किया. उन्होंने कहा, `मुझे राष्ट्रपति के रूप में देश ने एक ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में चुना है, जब हम अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. आज से कुछ दिन बाद ही देश अपनी स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे करेगा.` उन्होंने कहा, `ये भी एक संयोग है कि जब देश अपनी आजादी के 50वें वर्ष का पर्व मना रहा था, तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी. और आज आजादी के 75वें वर्ष में मुझे ये नया दायित्व मिला है.`

आदिवासी देख सकते हैं अपना प्रतिबिंब

उन्होंने कहा, `मैं देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूं जिसका जन्म आजाद भारत में हुआ है.` इससे पहले प्रतिभा पाटिल देश की पहली महिला राष्ट्रपति थीं. बोलीं- आजाद भारत में जन्मी मैं पहली राष्ट्रपति हूं. देश के गरीब आदिवासी इसमें अपना प्रतिबिंब देख सकते हैं. उन्होंने कहा, `कल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस भी है. ये दिन, भारत की सेनाओं के शौर्य और संयम, दोनों का ही प्रतीक है. मैं आज, देश की सेनाओं को तथा देश के समस्त नागरिकों को कारगिल विजय दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देती हूं.`

देश के सेनानियों को याद किया

इस दौरान उन्होंने देश के सेनानियों को याद किया और उनकी इच्छाएं पूरी करने की बात की. मुर्मू ने कहा, `हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने आजाद हिंदुस्तान के हम नागरिकों से जो अपेक्षाएं की थीं, उनकी पूर्ति के लिए इस अमृतकाल में हमें तेज गति से काम करना है. इन 25 वर्षों में अमृतकाल की सिद्धि का रास्ता दो पटरियों पर आगे बढ़ेगा- सबका प्रयास और सबका कर्तव्य.`

कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी

पुराने दौर को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, `मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से शुरू की थी.  मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूं, वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था. लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी.` इसे भी पढ़ें – ‘बंग">https://lagatar.in/nobel-laureate-amartya-sen-refuses-to-receive-banga-vibhushan-award/">‘बंग

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गरीबों के नाम अपनी उपलब्धि समर्पित

मुर्मू ने कहा, `मैं जनजातीय समाज से हूं, और वार्ड कौन्सिलर से लेकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मुझे मिला है. यह लोकतंत्र की जननी भारतवर्ष की महानता है.` उन्होंने आगे कहा, `ये हमारे लोकतंत्र की ही शक्ति है कि उसमें एक गरीब घर में पैदा हुई बेटी, दूर-सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी, भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है.` राष्ट्रपति ने अपनी उपलब्धि देश के गरीबों के नाम की है. उन्होंने कहा, `राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना, मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, ये भारत के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है.` उन्होंने कहा, `मेरा निर्वाचन इस बात का सबूत है कि भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है.` उन्होंने कहा, `मेरे लिए बहुत संतोष की बात है कि जो सदियों से वंचित रहे, जो विकास के लाभ से दूर रहे, वे गरीब, दलित, पिछड़े तथा आदिवासी मुझ में अपना प्रतिबिंब देख रहे हैं.`

हमारी सभी बहनें व बेटियां अधिक से अधिक सशक्त हों

राष्ट्रपति मुर्मू ने संबोधन के दौरान सबसे खास जिक्र महिलाओं का रहा. उन्होंने कहा, `मेरे इस निर्वाचन में देश के गरीब का आशीर्वाद शामिल है, देश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के सपनों और सामर्थ्य की झलक है.`  उन्होंने कहा, `मैं आज समस्त देशवासियों को, विशेषकर भारत के युवाओं को तथा भारत की महिलाओं को ये विश्वास दिलाती हूं कि इस पद पर कार्य करते हुए मेरे लिए उनके हित सर्वोपरि होंगे.` मुर्मू ने कहा, `मैं चाहती हूं कि हमारी सभी बहनें व बेटियां अधिक से अधिक सशक्त हों तथा वे देश के हर क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाती रहें.`

सभी सांसदों और विधायकों का आभार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक समय में जब भारत अगले 25 वर्षों के विजन को हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से जुटा हुआ है, मुझे ये जिम्मेदारी मिलना मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है. उन्होंने कहा कि भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर निर्वाचित करने के लिए मैं सभी सांसदों और सभी विधानसभा सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं. आपका मत देश के करोड़ों नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति है. इसे भी पढ़ें – जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-mp-vidyut-varan-mahto-attended-draupadi-murmus-swearing-in-ceremony/">जमशेदपुर

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निर्वाचन में युवाओं की भूमिका अहम

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उनके इस शीर्ष संवैधानिक पद पर निर्वाचन में पुरानी लीक से हटकर नए रास्तों पर चलने वाले भारत के आज के युवाओं का साहस भी शामिल है तथा वह ऐसे प्रगतिशील भारत का नेतृत्व करते हुए खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं. उन्होंने कहा कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद से लेकर रामनाथ कोविन्द तक, अनेक विभूतियों ने इस पद को सुशोभित किया है और इस पद के साथ साथ देश ने इस महान परंपरा के प्रतिनिधित्व का दायित्व भी उन्हें सौंपा है.

संबोधन में कवि भीम भोई की कविता का किया उल्लेख

उन्होंने कहा कि मैं आज समस्त देशवासियों को, विशेषकर भारत के युवाओं को तथा भारत की महिलाओं को ये विश्वास दिलाती हूं कि इस पद पर कार्य करते हुए मेरे लिए उनके हित सर्वोपरि होंगे. मुर्मू ने कहा कि संविधान के आलोक में वह पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगी और उनके लिए भारत के लोकतांत्रिक-सांस्कृतिक आदर्श और सभी देशवासी हमेशा ऊर्जा के स्रोत रहेंगे. राष्ट्रपति ने कहा कि जगन्नाथ क्षेत्र के एक प्रख्यात कवि भीम भोई की कविता की एक पंक्ति है: “मो जीवन पछे नर्के पड़ी थाउ, जगत उद्धार हेउ”. अर्थात, अपने जीवन के हित-अहित से बड़ा जगत कल्याण के लिए कार्य करना होता है. उन्होंने कहा कि जगत कल्याण की भावना के साथ, मैं आप सब के विश्वास पर खरा उतरने के लिए पूरी निष्ठा व लगन से काम करने के लिए सदैव तत्पर रहूंगी. इसे भी पढ़ें – विक्की">https://lagatar.in/vicky-kaushal-and-katrina-kaif-received-death-threats-mumbai-police-filed-a-case/">विक्की

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