Search

धर्मांतरण विरोधी कानूनों के विरोध में नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज की याचिका पर SC ने केंद्र व 12 राज्यों से जवाब तलब किया

New Delhi :  नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज द्वारा विभिन्न राज्यों में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट  में याचिका दायर किये जाने की खबर है.  बता दें कि पूर्व में सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस के अलावा कई अन्य याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी हैं.

 

नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया (एनसीसीआई) द्वारा दायर धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार, राजस्थान सहित 12 राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

 

एनसीसीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अपनी जनहित याचिका में धर्मांतरण रोधी कानूनों के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक की गुहार लगाई है.


 
CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एनसीसीआई की दलीलें सुनी और संज्ञान लेते हुए  केंद्र तथा 12 राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा.

 

साथ ही चीफ जस्टिस ने नयी जनहित याचिका को इस केस में दाखिल अन्य याचिकाओं के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया. CJI ने कहा, इस संबंध में तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया जायेगा. 

 

अहम बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने समय की कमी के कारण इसी साल पिछले माह 28 जनवरी को सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस के नेतृत्व वाली दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई नहीं की थी.  

 

इन याचिकाओं में धार्मिक धर्मांतरण को रेगुलेट करने वाले विभिन्न राज्यों में लागू किये गये कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गयी है. यह मामला CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने लिस्टेड है,

 

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि यह मामला 3 फरवरी, 2026 के लिए लिस्ट किया जाये. यानी अब इस पर कल, 3 फरवरी को सुनवाई होगी. इसी क्रम में आज सोमवार को नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज ने भी धर्मांतरण कानूनों के विरोध में याचिका दायर की है.

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.
 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp