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हजारीबाग में आजसू छात्र संघ का जनाक्रोश मार्च, सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलंद की आवाज

गांधी मैदान मटवारी से शुरू हुआ मार्च नारेबाजी करते हुए डीसी कार्यालय पहुंचा और कार्यालय के बाहर छात्रों ने धरना दिया. इसके बाद छात्र नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने डीसी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.
 

Hazaribagh : पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति भुगतान में हो रही देरी के खिलाफ आजसू छात्र संघ ने मंगलवार को हजारीबाग की सड़कों पर जबरदस्त प्रदर्शन किया. “शिक्षा के लिए भिक्षा” नाम से निकले जनाक्रोश मार्च में हजारों छात्रों ने भाग लिया और सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की.

 

गांधी मैदान मटवारी से शुरू हुआ मार्च नारेबाजी करते हुए डीसी कार्यालय पहुंचा और कार्यालय के बाहर छात्रों ने धरना दिया. इसके बाद छात्र नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने डीसी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.

 

आक्रोश मार्च में विनोबा भावे विश्वविद्यालय व हजारीबाग के विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राओं का सैलाब उमड़ पड़ा. हाथों में बैनर-पोस्टर लिए छात्र छात्रवृत्ति से जुड़े नारे लगाते चल रहे थे. छात्रों ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है.

 

मार्च का नेतृत्व संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, पीयूष चौधरी, सत्यम सिंह वे अन्य छात्र नेताओं ने किया. संजय मेहता भी मौजूद रहे.

ये हैं संघ की मुख्य मांगें


* वर्ष 2024-25 की लंबित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति तुरंत जारी हो.
* e-Kalyan पोर्टल पर सभी पेंडिंग आवेदनों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए.
* देरी के कारणों की जिला स्तर पर जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए.

छात्र नेताओं ने सरकार को घेरा

ओम वर्मा ने कहा “यह आंदोलन किसी दल का नहीं, बल्कि उन छात्रों की आवाज है, जो वर्षों से इंतजार कर रहे हैं. छात्रों के साथ अन्याय अब और नहीं सहा जाएगा. सत्यम सिंह ने कहा कि अगर एक भी छात्र छात्रवृत्ति से नहीं रहना चाहिए. हमारी लड़ाई सिर्फ छात्रवृत्ति की नहीं, बल्कि जवाबदेही की है. पीयूष चौधरी ने कहा कि छात्रवृत्ति हमारा अधिकार है. सरकार की चुप्पी लाखों विद्यार्थियों को संकट में डाल रही है. छात्रों की आवाज अब और तेज होगी. आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने कहा कि यह विरोध स्वाभाविक रूप से छात्रों के बीच उभरा है. जब आवेदन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता, तब जनता सड़क पर उतरने को मजबूर होती है. बड़े-बड़े आयोजनों पर करोड़ों खर्च कर सरकार छात्रों की मूल जरूरतों की अनदेखी कर रही है.

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