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सदन में राजेश कच्छप ने उठाया HEC विस्थापितों को बसाए गए गांवों की जमीन की अवैध बिक्री का मुद्दा

Ranchi: बजट सत्र के दौरान खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने एचईसी विस्थापितों को बसाए गए गांवों की जमीनों की अवैध बिक्री और निबंधन का गंभीर मामला सदन में उठाया. उन्होंने लटमा, आनी, मसियातू, धुर्वा, तुधुल और अरगो सहित दर्जनों गांवों का उल्लेख करते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया.
 

Ranchi: बजट सत्र के दौरान खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने एचईसी विस्थापितों को बसाए गए गांवों की जमीनों की अवैध बिक्री और निबंधन का गंभीर मामला सदन में उठाया. उन्होंने लटमा, आनी, मसियातू, धुर्वा, तुधुल और अरगो सहित दर्जनों गांवों का उल्लेख करते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया. राजेश कच्छप ने विधानसभा में मांग की पूरे मामले की जांच विधायकों की कमिटी बनाके किया जाये, लेकिन कमिटी नहीं बन सका. 

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क्या है पूरा मामला


1957-60 के बीच हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) कारखाने के लिए 23 गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी. विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए नए गांव बसाए गए और प्रत्येक परिवार को 10 से 20 डिसमिल जमीन दी गई, जिसके एवज में 368 रुपये सरकार को जमा कराए गए. लोगों ने अपने खर्च से मकान बनाए, लेकिन आज तक रजिस्टर-2 में नाम दर्ज नहीं होने के कारण मालिकाना हक नहीं मिला. इसका लाभ उठाकर जमीन के पूर्व मालिक कथित रूप से दोबारा बिक्री और निबंधन करा रहे हैं.


राजेश कच्छप ने आरोप लगाया कि जहां पहले से निर्माण हो चुका है, वहां भी दोबारा रजिस्ट्रेशन हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में भय और असमंजस की स्थिति है. उन्होंने एनआईसी पोर्टल में अनियमितताओं और अंचल रिकॉर्ड में बिना दर्ज जमीनों की लगान रसीद जारी होने का मामला भी उठाया.
जवाब में मंत्री दीपक बिरुआ ने मामले को संवेदनशील बताते हुए तीन महीने के भीतर उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देने की बात कही. दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया.

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