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झारखंड में राज्यसभा चुनाव और हॉर्स ट्रेडिंग: क्यों हर बार उठते हैं सवाल?

Ranchi: झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बीते दिन चुनाव आयोग को पत्र लिखकर भाजपा पर संभावित हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई है. पार्टी का कहना है कि विधानसभा में पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, जिससे विधायकों की खरीद फरोख्त की आशंका बढ़ रही है.

 

राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल

 

झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव लंबे समय से विवादों में रहे हैं. गठबंधन आधारित राजनीति और संख्याबल के सीमित अंतर के कारण यहां क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक दबाव की चर्चा अक्सर होती रही है. इसी वजह से हर बार राज्यसभा चुनाव के दौरान हॉर्स ट्रेडिंग जैसे आरोप सामने आते हैं.

 

2026 चुनाव को लेकर फिर बढ़ी हलचल

 

इस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आरोप लगाया है कि गठबंधन के पास बहुमत होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार उतार रही है, जिससे अनैतिक राजनीतिक गतिविधियों की आशंका पैदा हो रही है. पार्टी ने चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया पर विशेष निगरानी की मांग की है.

वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि उम्मीदवार उतारना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है.

 

विधानसभा में मौजूदा संख्याबल

 

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत होती है.

 

इंडिया ब्लॉक (महागठबंधन) की स्थिति मजबूत मानी जा रही है. इसके पास कुल 56 विधायक हैं. इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं.

 

वहीं एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं. इसमें भाजपा के 21, जदयू का 1, आजसू का 1 और लोजपा रामविलास का 1 विधायक शामिल है.

 

राजनीतिक स्थिति का आकलन

 

मौजूदा आंकड़ों के आधार पर महागठबंधन को दोनों राज्यसभा सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है. हालांकि झारखंड की राजनीति में पहले भी क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरण बदलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसलिए चुनाव को लेकर सस्पेंस और चर्चा बनी हुई है.

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