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खलखो vs खलखो : रांची मेयर चुनाव में मुकाबला दिलचस्प...

Ranchi :  रांची नगर निगम का मेयर चुनाव अब पूरी तरह दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है. चुनाव भले ही दलीय आधार पर नहीं हो रहा हो, लेकिन असल मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही माना जा रहा है. दोनों दल अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है.

 

इस बार चुनाव की खास बात यह है कि दोनों प्रमुख उम्मीदवारों का सरनेम एक ही है - खलखो. कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलखो और भाजपा समर्थित उम्मीदवार रौशनी खलखो के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, जिससे चुनाव और भी रोचक हो गया है. 

 

रमा खलखो ने भरा नामांकन, कांग्रेस ने दिखाई ताकत

कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलखो ने मंगलवार को मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया. रमा खलखो पहले भी रांची की मेयर रह चुकी हैं और वर्तमान में कांग्रेस की राज्य महिला इकाई की अध्यक्ष हैं. उनके पास नगर निगम चलाने का अनुभव है, जिसे कांग्रेस उनकी बड़ी ताकत मान रही है.

 

नामांकन के दौरान कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक ताकत का खुला प्रदर्शन किया. मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, कांके विधायक सुरेश बैठा, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, अजय नाथ शाहदेव, रांची महानगर अध्यक्ष कुमार राजा, मीडिया प्रभारी सतीश पॉल मुजनी और युवा नेता मोहम्मद जावेद सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे. 

 

भाजपा की उम्मीद : रौशनी खलखो

वहीं भाजपा समर्थित उम्मीदवार रौशनी खलखो भी मजबूत दावेदार के रूप में उभरी हैं. वे वार्ड 21 से पार्षद रह चुकी हैं और नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं होने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुकी हैं.

 

उनकी याचिका के बाद ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जल्द चुनाव कराने का निर्देश दिया था. भाजपा रौशनी खलखो को साफ-सुथरी छवि और विकासोन्मुख उम्मीदवार के रूप में पेश कर रही है. संगठन स्तर पर भाजपा बूथ मैनेजमेंट और कैडर एक्टिवेशन पर खास जोर दे रही है. 

 

कांग्रेस और भाजपा के लिए साख की लड़ाई

रांची का मेयर चुनाव अब कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए साख की लड़ाई बन गया है. यह चुनाव 23 फरवरी 2026 को होना है. भले ही यह गैर-दलीय चुनाव हो, लेकिन पर्दे के पीछे राजनीतिक दलों की भूमिका निर्णायक साबित होने वाली है. 

 

दोनों उम्मीदवारों के बारे में 

 

रमा खलखो :  पूर्व मेयर (2013), कांग्रेस की राज्य महिला इकाई की अध्यक्ष, प्रशासनिक अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत

 

रौशनी खलखो :  निवर्तमान पार्षद (वार्ड 21), नगर निकाय चुनाव के लिए हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता, विकास और समय पर चुनाव को प्रमुख मुद्दा बनाया

 

पार्टी समर्थन और राजनीतिक पृष्ठभूमि मुकाबले के प्रमुख कारक

रमा खलखो को कांग्रेस का पूरा समर्थन हासिल है और वे सत्तारूढ़ जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन का हिस्सा हैं. हालांकि, गठबंधन के भीतर मेयर पद को लेकर तालमेल की स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है. रमा के पक्ष में अनुभव है. लेकिन 2013 के चुनाव के दौरान कैश स्कैंडल से जुड़ा विवाद उनकी छवि पर असर डाल सकता है. वहीं, रौशनी खलखो को भाजपा का समर्थन प्राप्त है. 

 

2018 के चुनाव में भाजपा को मिली थी बड़ी जीत

2018 के नगर निगम चुनाव में भाजपा का दबदबा रहा था. 34 वार्डों में से भाजपा ने 21 सीटें जीती थीं. जबकि आजसू को 2 सीटें मिली थीं. कांग्रेस और जेएमएम ने 3-3 सीटें हासिल की थीं. भाजपा ने 2018 के रांची नगर निगम चुनाव में मेयर पद परभी बड़ी जीत दर्ज की थी, जब आशा लकड़ा ने जेएमएम उम्मीदवार को करीब 39 हजार वोटों से हराया था. 

 

किसका पलड़ा भारी?

फिलहाल रमा खलखो और रौशनी खलखो के बीच मुकाबला कांटे का है. एक्सपर्ट्स की मानें तो भाजपा समर्थित रौशनी खलखो का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आ रहा है. इसका कारण उनकी साफ छवि, कोर्ट में सक्रिय भूमिका और भाजपा की पिछली चुनावी सफलता बताया जा रहा है. हालांकि अगर सत्तारूढ़ गठबंधन पूरी तरह एकजुट होकर रमा खलखो के पक्ष में उतरता है, तो नतीजा बदल सकता है. अंतिम फैसला मतदाता टर्नआउट और स्थानीय मुद्दों पर निर्भर करेगा.

 

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