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रामेश्वर उरांव ने सदन में उठाए आदिवासी हितों के मुद्दे, शोध, शिक्षा व भूमि अधिकारों पर पहल की मांग

Ranchi :   झारखंड विधानसभा में अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक रामेश्वर उरांव ने आदिवासियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है.

 

 

रामेश्वर उरांव ने ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह संस्था आदिवासी समाज से जुड़े शोध और नीतियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन झारखंड में यह संस्थान कई समस्याओं से जूझ रहा है. उन्होंने बताया कि यहां स्थायी निदेशक और पर्याप्त स्टाफ की कमी है. नियमावली तैयार नहीं होने के कारण नियुक्तियां भी रुकी हुई हैं, जिससे शोध कार्य प्रभावित हो रहा है. उन्होंने सरकार से इस स्थिति को जल्द सुधारने की मांग की.

 

लोहरदगा विधायक ने आगामी परिसीमन और जनगणना को लेकर आदिवासियों के बीच मौजूद चिंता का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में परिसीमन के बाद आदिवासी सीटों की संख्या कम होने के उदाहरण सामने आए हैं. ऐसे में जनगणना के दौरान अधिकारियों को दुर्गम क्षेत्रों में जाकर सही तरीके से जनगणना करनी चाहिए, ताकि आदिवासी आबादी का सही आंकड़ा सामने आ सके और उनके राजनीतिक अधिकार सुरक्षित रहें.

 

शिक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए रामेश्वर उरांव ने कहा कि आजादी के समय आदिवासियों की साक्षरता दर बहुत कम थी, जो अब बढ़कर 60 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है. हालांकि उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है. उन्होंने कहा कि केवल कोचिंग सेंटर खोलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि यह समझने की जरूरत है कि आदिवासी छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पीछे क्यों रह रहे हैं.

 

रामेश्वर उरांव ने ट्राइबल सब प्लान के फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देना था, लेकिन कई जगहों पर इसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है. उन्होंने सरकार से इस फंड के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखने की मांग की.

 

वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन में हो रही देरी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनकी जमीन के अधिकार दिलाने की प्रक्रिया बहुत धीमी है. उन्होंने बताया कि राज्य में कई आवेदनों को खारिज कर दिया गया है और बड़ी संख्या में आवेदन अभी भी लंबित हैं. उन्होंने सरकार से इन मामलों का जल्द निपटारा करने की मांग की.

 

रामेश्वर उरांव ने सरकार से आग्रह किया कि आदिवासी समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से पहल की जाए, ताकि उनके सामाजिक और आर्थिक विकास को मजबूती मिल सके.

 

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