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Ranchi: सीयूजे में मनाया गया तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस, ISRO-NRSC के विशेषज्ञ हुए शामिल

झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में बुधवार को तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस उत्साह और वैज्ञानिक गतिविधियों के साथ मनाया गया. विश्वविद्यालय के भू-सूचना विज्ञान विभाग ने क्षेत्रीय सुदूर संवेदन केंद्र–पूर्व (RRSC-E), राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), कोलकाता के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया.
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Ranchi: झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में बुधवार को तीसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस उत्साह और वैज्ञानिक गतिविधियों के साथ मनाया गया. विश्वविद्यालय के भू-सूचना विज्ञान विभाग ने क्षेत्रीय सुदूर संवेदन केंद्र–पूर्व (RRSC-E), राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), कोलकाता के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया. इस वर्ष राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की थीम “सतत भविष्य के लिए अंतरिक्ष” (Space for a Sustainable Tomorrow) रही.

 

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आर. के. डे और कुलसचिव के. कोसला राव के अलावा विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं तथा ISRO और NRSC के विशेषज्ञ शामिल हुए. कार्यक्रम के संयोजक प्रो. ए. सी. पांडेय और समन्वयक डॉ. चंद्र शेखर द्विवेदी रहे.

 

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कार्यक्रम की शुरुआत भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के उद्देश्य पर चर्चा के साथ हुई. RRSC-E के डॉ. प्रबीर कुमार दास ने बताया कि अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग अब केवल अंतरिक्ष अनुसंधान तक सीमित नहीं है. कृषि, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, संचार, पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. 


तकनीकी सत्र में RRSC-E, ISRO के डॉ. अरिंदम गुहा ने “ISRO’s Moon Odyssey” विषय पर व्याख्यान दिया. उन्होंने भारत के चंद्र अभियानों और चंद्रमा के अध्ययन से जुड़ी उपलब्धियों की जानकारी साझा की. वहीं NRSC के वेंकट सुधाकर कोट्टी ने “Satellite Data Acquisition” विषय पर प्रस्तुति देते हुए उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के संग्रह और उनके व्यावहारिक उपयोग के बारे में बताया.

 

RRSC-E की डॉ. तनुमी कुमार ने “ISRO Outreach & Career Opportunities” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया. उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान, सुदूर संवेदन और संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध शिक्षा एवं करियर के अवसरों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित किया.

 

कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष विज्ञान और सुदूर संवेदन से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई. विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्र में ISRO के मिशन, उपग्रहों, अंतरिक्ष अनुसंधान तथा करियर से जुड़े सवाल पूछे.

 

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर स्कूली विद्यार्थियों के लिए क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई. इसमें नीरजा सहाय DAV पब्लिक स्कूल, आइडियल इंटरनेशनल स्कूल, ब्रिजफोर्ड स्कूल तुपुदाना और सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के विद्यार्थियों ने भाग लिया. क्विज मास्टर की भूमिका नीलाद्रि दास ने निभाई, जबकि निवेदिता सिन्हा ने प्रतियोगिता के संचालन में सहयोग किया.

 

कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न गतिविधियों और क्विज प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए. कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की अंतरिक्ष यात्रा और वैज्ञानिक उपलब्धियों से परिचित कराने के साथ अंतरिक्ष तकनीक के पृथ्वी और मानव जीवन में उपयोग की जानकारी दी गई. साथ ही विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया.

 

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