Ranchi: राज्य में ऑडिट के दौरान आम बागान की जगह तालाब मिले. कई जगहों से तालाब ही गायब मिले. गौशाला में आदमी रहते मिले. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर में स्कूल चलता मिला. ऑडिट टीम और प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण में मिली इस गड़बड़ी पर अफसरों ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया.
महालेखाकार ने राज्य के 24 जिलों में से सिर्फ छह जिलों में केंद्रीय योजनाओं का ऑडिट किया था. ऑडिट के दौरान सरकार द्स्तावेज में वर्णित ब्योरे के आधार पर कुछ योजनाओं का भौतिक सत्यापन किया गया. भौतिक सत्यापन में संबंधित जिले के अधिकारी भी साथ थे. भौतिक सत्यापन में सब कुछ उल्टा पुल्टा पाया गया. फिर भी संबंधित अधिकारियों की ओर से जांच कराने के बाद कार्रवाई करने का आश्वासन दिया. यानी संयुक्त रूप से किया गया भौतिक सत्यापन बेमानी है.
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भौतिक सत्यापन में मिला गड़बड़ी का ब्योरा
ऑडिट की टीम ने पूर्वी सिंहभूम जिले में मनरेगा के तहत बने आम बागान का भौतिक सत्यापन किया. लेकिन वहां आम बागान का नामो निशान नहीं मिला. आम बागान की जगह एक तालाब मिला. दस्तावेज में इस बात का उल्लेख किया गया था कि घाटशिला प्रखंड के आसना पंचायत में उपेन मानकी की एक एकड़ जमीन पर 3.73 लाख की लागत पर जून 2021 में आम बागान की योजना स्वीकृत की गयी थी. योजना के तहत बागान को पशुओं से बचाने के लिए उसके चारों तरफ गड्ढा करना था. बागान में 112 आम और 80 टिंबर के पौधे लगाये जाने थे. ऑडिट टीम ने दिसंबर 2024 में संयुक्त रूप से निरीक्षण किया तो जमीन पर तालाब मिला.

उपेन मानकी की जमीन पर आम बागान के बदले तालाब
गढ़वा जिले के पिपरडीह ग्राम पंचायत में विजया देवी की जमीन पर बना तालाब गायब मिला. अक्टूबर 2020 में विजया की जमीन पर 4.99 लाख की लागत पर तालाब की योजना स्वीकृत हुई थी. इसे अक्टूबर 2021 तक पूरा करना था. जून 2021 तक तालाब बनाने पर 3.29 लाख खर्च किया जा चुका था. फरवरी 2025 में भौतिक सत्यापन में वहां तालाब नहीं मिला.

विजया देवी की जमीन से तालाब ग़ायब
गोड्डा जिले के अमुवार संथाली और भटौंधा ग्राम पंचायत में अर्जुन बेसरा और झुमरी किस्कू की जमीन पर बना तालाब भी गायब मिला. दस्तावेज में अर्जुन बेसरा की जमीन पर 5.00 लाख की लागत और झुमरी की जमीन पर 4.99 लाख की लागत पर तालाब की योजना स्वीकृत की गयी थी. इन दोनों योजनाओं पर कुल 8.83 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया था. जनवरी 2025 में ऑडिट टीम ने जिले के अधिकारियों के साथ भौतिक सत्यापन किया. लेकिन दोनों ही तालाब गायब मिले.

अर्जुन बेसरा और झुमरी किस्कू की जमीन से तालाब ग़ायब
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत गुमला और पाकुड़ जिले में बने गौशाला में भौतिक निरीक्षण के दौरान गायों के बदले आदमी रहते मिले. यानी गौशाला को घर में बदल दिया गया था.

पाकुड़ के गौशाला में आदमी मिले
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत मनरेगा से गौशाला का निर्माण किया जाता है. पांच गायों के लिए बनाये जाने वाले गौशाला पर 1.51 लाख रुपये खर्च करने का नियम है. इस योजना के तहत वर्ष 2021-22 में गुमला जिले में दो और पाकुड़ में आठ गौशालाओं का निर्माण किया गया था. दस्तावेज में इसपर 14.27 लाख रुपये खर्च दिखाया गया था.

गुमला में गौशाला का इस्तेमाल गोदाम की तरह

गुमला में बेकार पड़ा गौशाला
योजनाओं के भौतिक सत्यापन में पाकुड़ के जिले में बने गौशाला में गायों के बदले आदमी मिले. गुमला जिले के एक गौशाला का इस्तेमाल गोदाम के तौर पर किया जा रहा था. गुमला जिले का एक गौशाला बेकार पड़ा मिला.

प्रधानमंत्री आवास योजना में सनराइज पब्लिक स्कूल के बगल में स्कूल मालिक का मकान
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के भौतिक सत्यापन में भी कई तरह की गड़बड़ी मिली. भौतिक सत्यापन में पाया गया कि बोकारो जिला के जरीडीह प्रखंड के चलगड्डा में एक ऐसे व्यक्ति को आवास स्वीकृत किया गया था, जिसके पास दो मंजिला मकान था. उसने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले आवास में सनराइज पब्लिक स्कूल खोल रखा था. खुद अपने पुराने दो मंजिला मकान में रहता है.

इन्हें भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ
रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड के जमीरा गांव में ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया था, जिसने छह लाख रुपये लेकर घर बनवाया था. इसके पास पहले से मोटरसाइकिल भी थी. भौतिक सत्यापन के दौरान उसने खुद बताया कि उसने मकान बनाने के लिए छह लाख रुपये कर्ज लिया.
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